बाल दिवस पर शर्मसार हुआ उत्तर प्रदेश, CM योगी को ‘मंदिर’ बनाने की चिंता लेकिन ‘बच्चों’ की नहीं

बाल दिवस पर शर्मसार हुआ उत्तर प्रदेश, CM योगी को ‘मंदिर’ बनाने की चिंता लेकिन ‘बच्चों’ की नहीं

उत्तर प्रदेश में बच्चों की मौत का सिलसिला ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार मामला गोरखपुर का नहीं बल्कि बहराइच का जहां पिछले 3 दिनों में करीब 9 बच्चों की मौत हो गई है।

मौत की वजह बुखार, डायरिया, निमोनिया, बर्थ एक्सपेसिया बताया जा रहा है वहीँ इस घटना के बाद एक बात निकलकर सामने आई है इसी अस्पताल में पिछले 12 दिनों में 26 बच्चों की मौत हो चुकी है।

अगस्त महीने में गोरखपुर में हुई बच्चों के मौत को अभी 2 ही महीने से ऊपर हुआ है की अब बहराइच में बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हो चूका है। इसी अस्पताल में बीते महीने में अक्टूबर में बीमारियों से लड़ते हुए 53 बच्चों की हो गई थी।

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ पी के टंडन का कहना है कि बच्चों की मौत की वजह सिर्फ ये है उन्हें सही वक़्त पर सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। डॉ का कहना है बच्चों की तबियत जब ख़राब हो जाती तो परिवार बच्चों को जल्दी अस्पताल में एडमिट नहीं करवाते ऐसे में बच्चें की हालत नाजुक हो जाती है।

फ़िलहाल अस्पताल के बाल रोग विभाग में 35 बच्चें बुखार, निमोनिया, डायरिया, बर्थ एक्सपेसिया जैसी बीमारी से लड़ रहे है। जिनमें से 12 से ज्यादा बच्चों की हालत गंभीर बताने के बाद उन्हें लखनऊ रेफेर कर दिया गया है।

वहीँ अगर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह की बात करें तो ना ही उनके ट्विटर हैंडल पर इसकी कोई सूचना है और ना ही उन्होंने ऐसी कोई जानकारी अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर दी है।

आजकल वो निकाय चुनाव प्रचार में काफी व्यस्त है इतने व्यस्त की उन्हें बच्चों की मरने की कोई ख़बर है भी की नहीं ये ख़बर उनके स्वास्थ्य मंत्रालय की ट्विटर हैंडल पर भी इसकी कोई जानकारी है।

उस ट्विटर हैंडल पर कुछ दिन पहले इलाहाबाद में वार्ड ऑफिस के ऑफिस का फीता कटते नज़र आ रहे है।

 

वहीँ अगर अभी की बात की जाये तो 3 घंटे पहले की तस्वीर ज़रूर है जिसमें स्वास्थ मंत्री जी बीजेपी सांसद मुरली मनोहर जोशी के साथ इलाहाबाद में नज़र आ रहे है।

वहीँ अभी कुछ ही देर पहले वो गोविंदपुर इलाहाबाद में कार्यालय का उद्घाटन करने में व्यस्त नज़र आ रहे है।

मासूम बच्चों की मौत की जवाबदेही सरकार की नहीं होती है क्या जब इतने बड़े स्तर पर सरकार दावे करती हो की सरकार ने कड़े कदम उठाये है और ना जाने क्या क्या क्या। नेताओं के लिए हर चुनाव इतना ज्यादा ज़रूरी हो गया है की उन्हें बच्चों की मौत तक नहीं दिखाई दे रही है।

Courtesy: boltahindustan

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