गूगल डूडल ने याद किया भारत की पहली महिला वकील कोर्नेलिया सोराबजी को

गूगल डूडल ने याद किया भारत की पहली महिला वकील कोर्नेलिया सोराबजी को
सर्च इंजन गूगल अपने अनोखे गूगल डूडल में कई अनजान मशहूर चेहरों को जगह देकर हमें-आपको रू-ब-रू करा रहा है। इसी कड़ी में गूगल ने भारत की कई मायनों में ‘फर्स्ट’ महिला कोर्नेलिया सोराबजी को उनकी 151वीं जयंती पर गूगल डूडल के जरिए याद किया है। कोर्नेलिया के नाम बॉम्बे यूनिवर्सिटी की पहली महिला ग्रैजुअट, ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय में कानून पढ़ने वाली पहली भारतीय महिला, किसी ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली भारत की पहली नागरिक, पहली भारतीय महिला वकील, भारत और ब्रिटेन में वकालत करने वाली पहली महिला जैसे कई ‘फर्स्ट’ शामिल हैं। आइए जानें देश की इस ‘फर्स्ट’ महिला के बारे में…
कोर्नेलिया सोराबजी का जन्म 15 नवम्बर 1866 को नासिक में एक पारसी परिवार में हुआ था।1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गयीं और 1894 में भारत लौटीं। पढ़ाई के दौरान भी उन्हें महिला होने के कारण काफी भेदभाव झेलना पड़ता था।
उस समय के समाज में महिलाओं को वकालत का अधिकार नहीं था। विदेश से कानून की पढ़ाई कर लौटीं सोराबजी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। अपनी प्रतिभा की बदौलत उन्होंने महिलाओं को कानूनी परामर्श देना आरंभ किया और महिलाओं के लिए वकालत का पेशा खोलने की मांग उठाई।
1907 के बाद कोर्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम की अदालतों में सहायक महिला वकील का पद दिया गया। एक लम्बी लड़ाई के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को हटाकर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया। सोराबजी बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट होने वाली पहली महिला थीं। ऑक्सफर्ड जाकर कानून की पढ़ाई करने वाली भी वह देश की सर्वप्रथम महिला थीं।
पारसी परिवार से संबंध रखने वाली कोर्नेलिया सोराबजी लेखिका और समाज सुधारक थीं। उन्होंने कई किताबें लिखीं और महिलाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया।
सोराबजी का जीवन संघर्ष की मिसाल है। ऑक्सफर्ड में पढ़ाई के लिए उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिली तो उन्होंने इसके खिलाफ भी जंग किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने पर्दानशीं महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। उस दौर में पर्दानशीं महिलाओं को अपने पति के सिवा किसी अन्य मर्द से बात तक करने की अनुमति नहीं थी।
Courtesy: NBT
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