स्माॅग को हटाने के लिए आर्टिफिशियल बारिश, एक्सपर्ट बोले- EIA टेस्ट जरूरी वरना पड़ेगा बैड इफेक्ट

स्माॅग को हटाने के लिए आर्टिफिशियल बारिश, एक्सपर्ट बोले- EIA टेस्ट जरूरी वरना पड़ेगा बैड इफेक्ट

लखनऊ.राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और स्माॅग को हटाने के लिए सरकार नए-नए तरीके अपना रही है। इसके तहत गुरुवार को पानी के टैंकर और फायर बिग्रेड की गाड़ियों से शहर के कई इलाकों में पानी का छ‍िड़काव किया गया। एनवायरनमेंट एक्सपर्ट डॉ. काशिफ इमदाद ने बताया, ”पहले इसका एनवायरनमेंट असेसमेंट टेस्ट जरूरी है, सिर्फ स्टडी के आधार पर कृतिम बारिश करेंगे तो फायदा कम नुकसान ज्यादा हो सकता है।” बता दें, मंगलवार रात प्रमुख सचिव अरविंद कुमार की अध्यक्षता में आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट की एक टीम ने यूपी प्रदूषण और पर्यावरण विभाग के साथ मिलकर सीएम योगी को आर्टिफिशियल बारिश पर प्रेजेन्टेशन दिया था। जिसका आज प्रैक्टिकल देखने को मिला। क्या है आर्टिफिशियल बारिश या क्लाउड रेन?…

– शहर में फैले स्माॅग को कम करने और बढ़ने से रोकने के लिए आर्टिफिशियल बारिश कराई जाती है। इसमें ऊंचाई से पानीं फौब्बारों के जरिए गिराया जाता है। इसे आर्टिफिशियल रेन या क्लाउड रेन कहते हैं।
– इसमें पानीं बहुत छोटे-छोटे बूंदों में बारिश की तरह से ही गिरता है। जिससे हवा में मौजूद प्रदूषण के कण पानी की बूंदों के साथ नींचे आ जाते हैं, और हवा में फैली धुंध कम हो जाती है।

कितनें प्रकार की होती है आर्टिफिशियल रेन
– इसे साधारण शब्दों में कहें 2 दो प्रकार की होती है। पहली जो सिर्फ पानी को र्फोस के साथ छोड़ा जाता है। जिसमें फायर बिग्रेड की गाड़ियों के द्वारा नीचे से या हवाई जहाज के जरिए ऊपर से पानी फौब्वारों से छोड़ा जाता है।
– दूसरा केमिकल के जरिए। जिसमें केमिकल्स को हवा में ऊंचाई पर छोड़कर क्लाउड सीडिंग के जरिए बारिश कराना।
– इस तरह की बारिश के लिए दो प्रकार के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। सिल्वर आयोडाइड और ड्राईआईज।
– इन केमिकल्स को बहुत ऊंचाई से छोड़ा जाता है। जिससे इनके कण नमीं को सोखकर बहुत छोटे-छोटे पानीं के कणों का निमार्ण करते हैं, और हवा के साथ बारिश के रूप में नीचे गिरते हैं।

सिल्वर आयोडाइड और ड्राईआईज क्या हैं?
– सिल्वर आयोडाइड और ड्राईआईज को एक साथ ओपन एयर में हाई लेवल पर छोड़ने के कुछ बाद ये बादलों को अपनंी ओर खाींचता है, नमीं का भार बढ़ता है और बारिश होती है।
– इस प्रकार के केमिकल्स को मिसाइल की तरह से छोटे छोटे इंजेक्शन के रूप में बनाकर भरते हैं। जो हवा में अपने छोड़ने पर अपने आप घुल जाते हैं। और केमिकल रिएक्शन शुरू हो जाता है।

एनवायरनमेंट असेसमेंट टेस्ट जरूरी वरना फायदा से ज्यादा होगा नुकसान
– आर्टिफिशियल रेन के लिए केमिकल्स का यूज करने से पहले ‘एनवायरनमेंट असेसमेंट टेस्ट’ जरूर होना चाहिए। ताकि कहीं पर भी इसका साइड इफेक्ट न हो।
– साथ ही पब्लिक हेल्थ, एनवायरनमेंट, वाइल्ड लाइफ से जुड़े हर तरह के एक्सपर्ट से बात करनीं चाहिए। पूरी तैयारी के बाद ही कुछ करना चाहिए।
– इसका सीधा असर वाटर क्वालिटी, एअर क्वालिटी पर हो सकता है। क्योंकि ड्राईआइज में सीओ 2 होता है, जो कि पर्यावरण के लिए खतरनाक है। फिर इसके साथ सिल्वर आयोडाइड की केमिकल बांडिंग हार्मफुल हो सकती है।

इसका आॅप्शन क्या है?
– साधारण तरीके से पानी का छिड़काव करने पर कोई नुकसान नहीं है। इसे तो कराया जा सकता है, लेकिन केमिकल्स के जरिए आर्टिफिशियल रेन करवानें से पहले हमें दिसंबर के विंटर रेनफाॅल का वेट करना चाहिए।
– दिसंबर लास्ट में पश्चिमी विक्षोब के दबाव में विंटर सीजन में बारिश होती है। कभी-कभी तेज हवा चलने से भी प्राॅबलेम साल्व हो जाती है।
– बता दें, इंडिया में 1970 के दशक के बाद से अब तक आर्टिफिशियल रेन हेलिकाॅप्टर से तमिलनाडु राजस्थान, महाराष्ट्र में कराई गई है। लेकिन इसके साइड इफेक्ट पर कभी स्टडी नहीं हुई।

कौन हैं डॉ. काशिफ इमदाद ?
– डॉ. काशिफ इमदाद जियोलाॅजी में डाक्टरेट हैं। इस वक्त कानपुर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। यूएनडीपी और राज्य सरकार की ओर से लखनऊ का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान के एग्जिक्यूटिव मेम्बर हैं।
– हाल ही में इन्हें यूपी के स्मार्ट सिटी एंड अर्बन ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम के एक्सपर्ट पैनल में शामिल किया गया है। अभी तक क्लाइमेट चेंज, डिजास्टर मैनेजमेंट, अर्बन डेवलपमेंट पर रिर्सच कर चुके हैं। इसके अलावा ये इंटरनेशनल जर्नल आॅफ अप्लाइड रिमोट संेसिंग सिस्टम पर रिसर्च पेपर पब्लिशिंग के हेड के तौर पर काम कर रहे हैं।

Courtesy: Bhaskar

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