भूख’ से मर गई 55 साल की सकीना, मौत के दो दिन बाद घर पहुंचीं अनाज की बोरियां

भूख’ से मर गई 55 साल की सकीना, मौत के दो दिन बाद घर पहुंचीं अनाज की बोरियां

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित फतेहगंज इलाके में बेहद दुखद मामला सामने आया है। यहां नई बस्ती में रहने वाली 55 वर्ष की सकीना की कथित तौर पर खाने की कमी के कारण मौत हो गई। हालांकि प्रशासन ने इससे इनकार किया है। सहयोगी इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक महिला के छोटे बेटे शमशाद को राशन नहीं दिया गया, क्योंकि सकीना स्थानीय पीडीएस दुकान पर बायोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए अंगूठा लगाने नहीं पहुंच पाई थी। हैरानी की बात है कि महिला की मौत के दो दिनों के बाद प्रशासन ने उसके घर पर अनाज की बोरियां भिजवाईं। 18 वर्षीय शमशाद ने बताया कि अहमद नवी नाम के दुकानदार ने मुझसे कहा कि अम्मी को लाए बिना इस महीने का राशन नहीं मिलेगा। दो खराब चारपाई और राशन की बोरियों के साथ तिरपाल से बने घर में बैठे सकीन के पति मोहम्मद इशाक ने कहा कि सकीना को लकवा मार गया था और वह चल-फिर नहीं सकती थी। इशाक ने कहा कि पहले हम उसे चारपाई पर डालकर अंगूठा लगाने की प्रक्रिया पूरी करने ले गए थे, लेकिन इस बार वह बहुत ज्यादा बीमार थी, जिस कारण उसका चलना-फिरना असंभव था।

अंत्योदय अन्न योजना के तहत सरकार की ओर से परिवार को 85 रुपये में 35 किलो चावल दिया जाता है। दुकानदार नवी ने कहा, ”इशाक ने मुझे कभी नहीं बताया कि उसकी पत्नी चल-फिर नहीं सकती, वरना मैं अंगूठे का निशान घर से ले लेता। हमें भी स्कीम के तहत राशन बांटने की प्रक्रिया पूरी करनी है।” उन्होंने कहा, ”इस योजना के करीब 80 प्रतिशत लाभार्थी हैं, जिन्हें नियमित रूप से राशन दिया जाता है।” वहीं सकीन के घरवालों ने उनकी मौत के 4 दिन बाद भी खाना नहीं खाया है।

बरेली के डीएम आर विक्रम सिंह ने शुक्रवार को इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”इसमें कोई शक नहीं कि परिवार बहुत गरीब है, लेकिन यह विश्वास करना मुश्किल है कि महिला की मौत भुखमरी से हुई। उनकी मौत मंगलवार सुबह हुई और उसी शाम को उन्हें दफना दिया गया। पोस्टमॉर्टम भी नहीं किया गया, जिससे मौत के कारणों का पता चल पाता। डीएम ने यह भी कहा कि परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को घर दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय प्रशासन ने उन्हें 5 कंबल भी दिए हैं।

 

Courtesy: jansatta

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