सोहराबुद्दीन मामलें में CBI जज की मौत पर परिवार ने उठाए सवाल, अमित शाह है शक के दायरे में

सोहराबुद्दीन मामलें में CBI जज की मौत पर परिवार ने उठाए सवाल, अमित शाह है शक के दायरे में

द कारवां पत्रिका की खबर के मुताबिक सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले को सुन रहे सीबीआई न्यायधीश ब्रजगोपाल हरकिशन लोया की मौत पर उनके परिवार वालों ने सवाल उठाए हैं। 1 दिसंबर 2014 की सुबह, बीजे हरकिशन लोया के परिवार को फोन आया की उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गई है। बता दें, कि लोया अपने सहकर्मी की बेटी की शादी में नागपुर गए हुए थे। वो विवादित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले को सुन रहे थे जिसमें मुख्य आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह थे।

लोया के परिवार ने द कारवां पत्रिका के पत्रकार को नवम्बर 2016 से नवम्बर 2017 के बीच चली बातचीत में बताया कि उन्हें इस बात का शक है कि लोया की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से नहीं हुई थी। ये बातचीत पत्रकार और न्यायधीश लोया की बहन अनुराधा बियानी, दूसरी बहन सरिता मानधने और लोया के पिता हरिकिशन की बीच चली।

पत्रकार ने न्यायधीश लोया की पत्नी से मिलने की कोशिश की लेकिन उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि वो मरना नहीं चाहती। गौरतलब है कि लोया की मौत के बाद उनका परिवार मीडिया के सामने नहीं आया था।

परिवार के लोगों ने बताया कि लोया ने मरने से पहले 30 नवम्बर 2016 को फोने पर 40 मिनट तक अपनी पत्नी से बात की थी। बातचीत के दौरान वो बीमार नहीं लग रहे थे।

लोया के पिता हरिकिशन ने बताया कि उस समय वो लातूर में थे जब उन्हें एक आरएसएस कार्यकर्ता इश्वर बहेती का फोन आया की लोया की मृत्यु हो चुकी है। बियानी कहती हैं उस आरएसएस कार्यकर्ता को कब, कहा और कैसे मृत्यु के बारे में पता चला? लोया की दूसरी बहन सरिता मानधने बताती हैं कि जब उन्हें म्रत्यु के बारे में पता चला तो वो लातूर के सरदा अस्पताल में भरती अपने भतीजे को लेने गई। वहां इश्वर बहेती उन्हें मिला। उसने उन्हें बताया कि लाश अब नागपुर में नहीं है उसे एम्बुलेंस से गातेगांव लाया जा रहा है। एक आम कार्यकर्ता का इतना सब जानना चौकाने वाला था।

गातेगांव में जब लोया के परिवार पहुँचने के बाद रात 11:30 तक लोया की लाश को भी गातेगांव पहुंचा दिया गया। लोया के परिवार वाले ये देखकर हैरान थे कि एम्बुलेंस में लोया का कोई भी सहकर्मी नहीं आया था। केवल ड्राईवर ही लाश को ला रहा था। जबकि नागपुर जाने के लिए उनके सहकर्मियों ने ही लोया पर ज़ोर डाला था और वो लोग साथ में ही गए थे। वो एक सीबीआई कोर्ट के जज थे लेकिन कोई सुरक्षाकर्मी तक लाश के साथ नहीं था।

परिवार के लोगों ने बताया कि लोया की शर्ट पर खून के धब्बे थे और पेंट के बटन टूटे हुए थे। बियानी कहती हैं कि एक डॉक्टर होने के नाते उन्हें पता है कि पोस्टमार्टम के दौरान खून बहार नहीं आता है तो फिर लोया की शर्ट पर खून क्यों था? उन्होंने दूसरे पोस्टमार्टम करवाना चाहा लेकिन लोया के सहकर्मियों और दोस्तों ने उन्हें इसके लिए मना करा। हरिकिशन कहते हैं कि उस समय हमारा पूरा परिवार डरा हुआ था।

पोस्टमार्टम पर संदेह जताते हुए लोया के परिवार वालों ने बताया कि पोस्टमार्टम करने से पहले उनसे इजाज़त नहीं ली गई। न ही बाद में उन्हें पोस्टमार्टम का पंचनामा दिया गया।

बियानी ने बताया कि लोया का मोबाइल भी उनको पुलिस द्वारा नहीं बल्कि आरएसएस कार्यकर्ता बहेती द्वारा दिया गया। बियानी ने बताया कि वो फोन हमे मृत्यु के चार दिन बाद दिया गया जबकि हमने पहले ही फोन की मांग की थी। उन्होंने बताया कि उसमे से सब डिलीट हो चूका था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लोया के म्रत्यु का समय सुबह 6:15 दिया हुआ है जबकि उनके परिवार वालों ने बताया कि उन्हें सुबह 5 बजे से ही म्रत्यु की खबर के फोन आने शुरू हो गए थे। पत्रकार द्वारा की गई छानबीन में नागपुर के सरकारी अस्पताल (जहाँ पोस्टमार्टम हुआ था) और नागपुर पुलिस स्टेशन के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने स्वयम रात में ही लोया की लाश को देखा था। ये भी पता चला कि लोया का पोस्टमार्टम आधीरात को किया गया था। तो फिर रिपोर्ट में सुबह का समय क्यों लिखा था?

लोया की बहन बियानी उनकी मौत पर बहुत से सवाल उठाती हैं। क्यों दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें ऑटोरिक्शा में अस्पताल ले जाय गया? लोया एक सरकारी गेस्टहाउस रवि भवन में रुके हुए थे जहाँ बड़े जज और मंत्री रुकते हैं क्या वहां कोई गाड़ी नहीं थी? जबकि रवि भवन से ऑटोरिक्शा स्टैंड दो किलोमीटर दूर है और आसपास ऑटो नहीं मिलता है।

क्यों दिल का दौरा पड़ने पर परिवार के लोगों को नहीं बताया गया? क्यों पोस्टमार्टम के लिए परिवार के लोगों से इजाज़त नहीं ली गई? अगर उनकी मौत दिल के दौरे से हुई थी तो पोस्टमार्टम क्यों करा गया? क्या कोई और भी कारण था?

क्यों उनकी मौत के बाद उनके वो सहकर्मी जो उन्हें नागपुर की शादी में ले गए थे परिवार से मिलने एक महीने से भी ज़्यादा समय के बाद आए? क्या वो डरे हुए थे? लोया की पत्नी को किस बात का डर है जो उन्होंने मीडिया से बात नहीं की?

लोया को कभी दिल के दौरे की कोई शिकायत नहीं थी। वो रोज़ दो घंटे टेबल टेनिस खेलते थे। उन्हें डायबाटीज़ और ब्लडप्रेशर की भी बीमारी नहीं थी? बियानी कहती हैं कि मैं एक डॉक्टर हूँ और जो कारण रिपोर्ट में मेरे भाई की मौत के बताएं गए मुझे उसपर मुझे यकीन नहीं होता।

 

Courtesy: boltahindustan

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