सरकार के खिलाफ एकजुट हुए 21 राज्यों के किसान, गूंजे नारे- मोदी ने अन्नदाताओं को ‘गुलाम’ बना दिया

सरकार के खिलाफ एकजुट हुए 21 राज्यों के किसान, गूंजे नारे- मोदी ने अन्नदाताओं को ‘गुलाम’ बना दिया

जब देश की संसद किसानों की समस्याओं पर मौन पड़ जाये और सरकार कर्ज माफ़ी का झूठा ढोंग करके उसे सस्ते में निपटाने की सोचने लगे तो उस देश को कैसे कहा जा सकता है कि वो देश कृषि प्रधान है।

आज दिल्ली के संसद मार्ग पर हजारों किसान फसलों के उचित दाम और कर्जमुक्ति की मांग को लेकर एकत्रित हुए थे। अनेक राज्यों के लोग एक जगह मगर मूल समस्या एक किसान की बढ़ती आत्महत्या कम हो और वो सशक्त बने।

किसान मुक्ति संसद को संचालित करती सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने सभी किसान महिलाओं को एक करके मौका दे रही थी। एक करके आती महिलाओं की मांग में किसानों को उनकी सही लागत और कृषि मजदूरी और आदिवासियों और भूमिहीन कृषि कामगारों को एक बेहतर जीवन जीने की मांग करते हुए अपनी बात रखी।

10 करोड़ किसानों को विस्‍थापित कर दिया गया- मेधा पाटकर

मंच से सभी महिला किसान को बोलने का मौका देती मेधा ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि सरकार ने नर्मदा घाटी के किसानों सहित देशभर से करीब 10 करोड़ किसानों को बिना पुनर्वास की सुविधाएं दिए विस्थारपित कर दिया है। किसानों के विकास के संबंध में कोई वैकल्पिक नीति लागू नहीं की गई। उन्हों ने कहा कि किसान विकास चाहते हैं विनाश नहीं।

उन्होंने आगे किसान की आत्महत्याओं पर भी अपनी बात रखी और कहा कि देशभर में किसानों ने आत्‍महत्‍याएं की लेकिन सरकार फिर भी किसानों पर ध्‍यान नहीं दे रही। सरकार नीतियां तो बना रही है, लेकिन वे सभी किसान विरोधी हैं किसानों को विकास चाहिए, विनाश नहीं।

कृषि प्रधान देश में किसान सत्ता का गुलाम बन गया है- योगेन्द्र यादव

योगेन्द्र यादव ने बोलता हिंदुस्तान से बात करते हुए कहा कि हमारी सिर्फ दो मांगें है पहली ये की किसानों की कृषि उपज के लाभकारी मूल्‍य का विधेयक बने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार लाभकारी कीमतें उत्पादन लागत के 50 फीसदी ऊपर होनी चाहिए और दूसरी मांग यह है कि सभी कृषि ऋण पर एक बार छूट मिलनी चाहिए। जिससे किसानों की समस्या का समाधान हो सके।

ये पूछने पर की क्या ‘जय जवान जय किसान’ का नारा अब गायब होता नज़र आ रहा है तो उन्होंने कहा कि देश में किसान ही है जो पूरे देश के लिए रोजी-रोटी पैदा कर रहा है। अगर इसी को दरकिनार किया जाएगा तो सभी के लिए मुश्किलें होंगी।

आगे उन्होंने कहा कि इस देश की यही विडंबना है की जो देश कृषि प्रधान देश हो आज उसी किसान को  सत्ता का गुलाम दिया गया है। आज उसकी परवाह करने वाला कोई ही नहीं है।

योगेन्द्र ने कहा कि इसमें अकेले सिर्फ केंद्र सरकार ज़िम्मेदार ही नहीं है इसमें राज्य की सरकारें भी बराबर की भागीदार है जिस तरह से किसान कर्ज के नाम पर मजाक होता है उसमें राज्य सरकारों की अहम भूमिका अदा करती है। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार से सिर्फ चुनाव वाले राज्यों में ही नहीं, बल्कि सभी राज्यों के कृषि ऋण को माफ करने की अपील करते हैं।

उन्होंने किसानों की आवाज़ को ऊपर बताते हुए कहा कि अब किसान ये लड़ाई खुद किसान अब अकेले लड़ेगा और जीत भी हासिल करेगा। पिछले कुछ वर्षो में राज्य सरकारों ने कदम उठाए हैं, लेकिन जब तक केंद्र सरकार इसमें कदम नहीं उठाएगी, ऋण को माफ नहीं किया जा सकता।

Courtesy: boltahindustan

Categories: India
Tags: BJP, Government, kisan, Modi, PM

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