मोदी सरकार का बड़ा खेल, कच्चे तेल पर आयात शुल्क बढ़ने पर भी किसानों की हालत खराब, जनता बर्बाद, उद्योगपति खुश

मोदी सरकार का बड़ा खेल, कच्चे तेल पर आयात शुल्क बढ़ने पर भी किसानों की हालत खराब, जनता बर्बाद, उद्योगपति खुश

देश में बड़े स्तर पर उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने का खेल खेला जा रहा है जिसमें हार सिर्फ जनता की हो रही है। हाल ही में मोदी सरकार ने कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क 15% से बढ़ाकर 30% और रिफाइंड पर 25% से बढ़ाकर 40% कर दिया है।

इसके पीछे कारण बताया गया है कि देश में खाद्य तेल के दाम बढ़े और किसान को फायदा हो लेकिन स्थिति कुछ ऐसी नज़र आ रही है की फायदा केवल उद्योगपतियों को हो रहा है और किसानों की हालत वही बनी हुई है।

बिज़नस स्टैण्डर्ड की खबर के मुताबिक, भले ही इसकी वजह अंदर की जानकारी हो या उनका सही अंदाजा, मगर कुछ बड़े कारोबारियों ने केंद्र सरकार के शुक्रवार को खाद्य तेल पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की घोषणा से पहले देश में बड़े स्तर खाद्य तेल की खरीदारी कर ली है। इससे एक्सचेंजों में सोमवार को खाद्य तेलों की कीमतें 4 फीसदी बढ़ गई हैं।

शुक्रवार शाम को एनसीडीईएक्स के सबसे बड़े कारोबारियों के पास लॉन्ग से तीन गुनी शॉर्ट पोजिशन थीं, इसलिए पूरा बाजार ही शॉर्ट था। मतलब इस खरीद के कारण बाज़ार में सोया तेल की कमी हो गई।

हालत ये थी कि सोया तेल में सबसे बड़े खरीदार के पास 31,940 लॉट की खरीद पोजिशन थी, जबकि सबसे बड़े बिकवाल (बेचनेवाले) के पास 6,310 लॉट की पोजिशन थी। इसका मतलब है कि खरीदार कारोबारियों को आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का पता था।

अब खाद्य तेल रिफाइनरियां जल्द ही कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती हैं। एक्सचेंजों पर सोमवार को कच्चे पाम तेल (सीपीओ) और सोया तेल की कीमतें 4 फीसदी के ऊपरी सीमा को छू गईं।

बाज़ार के जानकारों का कहना है कि बड़े कारोबारियों ने शुल्क बढ़ने से पहले खरीद पोजिशन बढ़ाईं और अब कीमतों में बढ़ोतरी और इनके ऊंचे बने रहने से वह तगड़ा मुनाफा कमाएँगे।

किसानों की हालत वही बनी हुई है। इंदौर की थोक मंडियों में बेंचमार्क सोयाबीन के दाम सोमवार को 2,700 रुपये से बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। ये अब भी सरकार के 3,050 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम हैं।

सरकार ने आयात शुल्क तो बढ़ाया लेकिन जो उद्देश्य इसका बताया गया था वो पूरा ही नहीं हुआ है। हाँ बाज़ार की स्तिथि से ये साफ़ है कि उद्योगपति बड़ा मुनाफा कमाने वालें हैं।

सवाल ये है कि उनकों अचानक आयात शुल्क के बढ़ने का कैसे पता चला? अब कीमतें बढ़ेंगी जिसका बोझ जनता उठाएगी और किसान भी बर्बाद का बर्बाद ही रहेगा।

Courtesy: boltahindustan

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