गुजरात में अगर ‘विकास’ हुआ होता तो आज अमित शाह को ‘जनता’ से इतनी दूर खड़े होकर भाषण नहीं देना पड़ता

गुजरात में अगर ‘विकास’ हुआ होता तो आज अमित शाह को ‘जनता’ से इतनी दूर खड़े होकर भाषण नहीं देना पड़ता

गुजरात चुनाव के मतदान होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। मुख्य पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस के नेता समेत तीनों युवा तिकड़ी (हार्दिक, जिग्नेश, अल्पेश) मेहनत से चुनाव प्रचार करने में जुटे हुए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी जनता के बीच जाकर उनसे मिल रहे हैं और उनके साथ सेल्फी ले रहे हैं।

सर्वमान्य है कि राजनेता जनता के द्वारा चुने जाते हैं, माना जाता है कि जो नेता जनता के बीच में जाकर उनकी परेशानियों को सुनता है जनता उनसे उतना ही आत्मीय तौर पर जुड़ती है। हाँ ! वर्तमान में अगर मीडिया ‘आत्मीयता’ रखने वाले नेताओं को गलत तरीके से प्रोजेक्ट करे तो वो अलग बात है।

लेकिन गुजरात चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की एक फोटो वायरल हो रही है जिसमें वो एक रैली को मंच से संबोधित करते हुए जनता से बहुत दूरी बनाए हुए हैं।

 

लोग अमित शाह की इस फोटो को गुजरात के ‘विकास’ से जोड़कर देख रहे हैं कि अगर गुजरात में बीजेपी की 22 सालों की सरकार ने सचमुच विकास कार्य किया है तो वो ‘जनता’ से इतनी दूरी क्यों बनाए हुए हैं।
गुजरात के विकास मॉडल का इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत उनकी कैबिनेट के चुनाव प्रचार कर रहे 50 मंत्री गुजरात में विकास की बात ही नहीं कर रहे।

बीजेपी के नेता विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगा रहे है कि वो जातिगत राजनीति कर रहे हैं। जबकि खुद बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में 52 पाटीदारों को टिकट देकर जातिगत राजनीति को बढ़ावा दिया है।
यह साफ़ है कि जो आरोप भाजपा विपक्ष पर लगा रही है खुद भाजपा वही काम कर रही है।

 

Courtesy: boltahindustan.

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