राफेल डील में सीधे फंसी मोदी सरकार : जिस विमान को क़तर ने 704 करोड़ में खरीदा उसी विमान को भारत ने 1571 करोड़ में क्यों खरीदा ?

राफेल डील में सीधे फंसी मोदी सरकार : जिस विमान को क़तर ने 704 करोड़ में खरीदा उसी विमान को भारत ने 1571 करोड़ में क्यों खरीदा ?

पश्चिम एशियाई देश क़तर ने फ्रांस के साथ राफेल विमान खरीदने की डील की है। ये वही विमान है जिसे भारत फ्रांस से खरीद रहा है और जो इस समय हमारे देश में विवाद का मुद्दा भी बना हुआ है। आरोप है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है।

मोदी सरकार पर लगा ये आरोप अब और मज़बूत हो गया है क्योंकि क़तर ने ये विमान भारत से सस्ती कीमत पर खरीदा है।

क़तर की डील

क़तर ने फ्रांस के साथ 12 राफेल विमान 1.3 अरब डॉलर में खरीदने की डील की है। मतलब ये डील कुल 8 हज़ार 450 करोड़ में हुई है। इस हिसाब से क़तर एक विमान के लिए 704 करोड़ की रकम देगा। वहीं भारत इसी विमान के लिए दोगुनी रकम दे रहा है।

मोदी सरकार ने 36 राफेल विमान 8.7 अरब डॉलर में खरीदने की डील की है। मतलब 56 हज़ार 556 करोड़ रुपये। इस हिसाब से एक विमान की कीमत 1571 करोड़ होती है।

मोदी सरकार पर आरोप

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर यही आरोप पर लगाया था। बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस ने कहना है कि यूपीए में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल विमानों को राफेल 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर बनाती। लेकिन मोदी सरकार द्वारा करी गई डील में अब जहाज़ उद्योगपति अनिल अम्बानी की कंपनी बनाएगी।

 

Courtesy: boltahindustan

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