जिस प्रोजेक्ट से ‘विकास पुरुष’ बने थे मोदी, उसी की वजह से राहुल के निशाने पर

जिस प्रोजेक्ट से ‘विकास पुरुष’ बने थे मोदी, उसी की वजह से राहुल के निशाने पर

अहमदाबाद से 40 किलोमीटर दूर साणंद 8 साल पहले तक एक सामान्य उपनगर था. अब इस शहर में 47 हजार घर हैं और और यह गुजरात का ऑटो हब बन गया है. साल 2010 में यहां टाटा नैनो प्लांट लगाया गया था, जो कि बाद में नरेंद्र मोदी के विकास का गुजरात मॉडल साबित हुआ. अब इस फैक्ट्री को लेकर राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और गुजरात चुनाव में यह मुद्दा बना हुआ है.

वडनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, ‘लगभग आधे गांव की जमीन लेकर टाटा नैनो प्लांट बनाया गया था. किसानों से जमीन ली गई, लेकिन किस लिए? मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं कि आप ने टाटा नैनो को गुजरात की सड़कों पर चलते हुए देखा है? क्या इस कारखाने में कोई काम हो रहा है? क्या आप जानते हैं कि इससे कितनी कारें बन रही हैं? एक दिन में दो कार?’ राहुल ने टाटा नैनो की घटती बिक्री पर सवाल उठाए.

बता दें कि टाटा नैनो प्लांट पहले पश्चिम बंगाल में लगना था. लेकिन वहां लेफ्ट फ्रंट की सरकार इस मुद्दे पर विवादों में आ गई और यह प्लांट गुजरात में लगाया गया.

साल 2008 में टाटा मोटर्स ने रतन टाटा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए पश्चिम बंगाल के सिंगूर को चुना था. हालांकि, इसके बाद भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर लेफ्ट फ्रंट की सरकार विवादों में आ गई और उसपर कई आरोप लगे. ममता बनर्जी उस समय वहां विपक्ष की नेता थीं. उन्होंने टाटा प्लांट के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया. बनर्जी के विरोध की वजह से टाटा अपने इस प्रोजेक्ट को पश्चिम बंगाल से ले जाने के बारे में सोचने लगे. इसी बीच इसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री होती है.

मोदी ने भेजा था मैसेज
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी ने रटन टाटा को एक शब्द का मैसेज भेजा था. जिसमें लिखा था ‘सुस्वागतम’. इसके बाद प्लांट सिंगूर से साणंद आ गया और 14 महीने में फैक्ट्री बनकर तैयार हो गई. इस घटना के बाद ममता और मोदी में भी एक जंग छिड़ी. ममता ने अपनी छवि जननेता के रूप में तैयार की. इतना ही नहीं 34 साल की लेफ्ट सरकार को हराते हुए वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं. वहीं, नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर एक विकास पुरुष के रूप में स्थापित हुए.

बिजनेस फ्रेंडली राज्य बना गुजरात
गुजरात ने खुद को बिजनेस फ्रेंडली राज्य साबित करने के लिए टाटा को कई तरह के टैक्स में छूट दी. इसका दूरगामी असर देखने को मिला और जल्द ही फोर्ड, प्यूजो, हिताची और दूसरी मल्टीनेशनल कंपनी भी साणंद पहुंची. हालांकि, 8 साल में ही क्षेत्रीय और विपक्ष के नेताओं ने टाटा फैक्ट्री की आलोचना शुरू कर दी, जिसके बाद गुजरात मॉडल भी आलोचनाओं की गिरफ्त में आ गया.

साणंद के रहने वाले और अहमदाबाद जिला कांग्रेस के लीगल सेल के सदस्य अमर सोलंकी का कहना है, ‘जब टाटा नैनो प्लांट का निर्माण किया जा रहा था तो क्षेत्रीय लोग काफी खुश थें. मोदी ने वादा किया था कि कैसे ये साणंद और गुजरात के विकास को गति देगा. लेकिन, जल्द ही इन दावों की पोल खुल गई. बहुत कम क्षेत्रीय लोगों को इसमें नौकरी मिली. इन कंपनियों ने कहा कि साणंद के लोगों के पास कंपनी में काम करने के लिए तकनीकी ज्ञान नहीं है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘प्लांट के निर्माण के लिए बेतरतीब तरीका अपनाया गया. उदाहरण के तौर पर प्लांट को उस जगह लगाया गया, जहां से बारिश का पानी निकलता था. इससे मानसून के मौसम में साणंद में भारी पानी जमा हो जाता है और लोगों को परेशानियों को सामना करना पड़ा था.

लोग बने करोड़पति
कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) के सदस्य और क्षेत्रीय बीजेपी नेता दिलीप बराड को साल 2008 में ग्रामीणों से जमीन लेने के लिए बातचीत करने के लिए इंचार्ज बनाया गया था. बराड सोलंकी के आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं, राज्य सरकार ने उपजाऊ जमीन को लेकर पूरी तरह सतर्क थी. उसने इन जमीनों को प्लांट के लिए नहीं दिया. हम लोगों ने सिर्फ बंजर और अनुर्वर 1100 एकड़ जमीनों को ही नियम संगत लिया. वहीं, दूसरे 600 एकड़ जमीन को फोर्ड के प्लांट के लिए लिया गया. उन्होंने कहा, किसानों को जमीन का उचित मूल्य मिला. इससे जिन किसानों को अपनी बंजर जमीन से कुछ नहीं मिलता था अब वह करोड़पति हो गए हैं. हालांकि, वहां के कुछ क्षेत्रीय लोग बराड के दावे का समर्थन करते हैं और कहते हैं कि कुछ किसानों को बहुत पैसा मिला.

ज्यादातर बाहरी करते हैं काम
प्रदीप सिंह वाघेला कहते हैं, साणंद में काम करने वाले ज्यादातर लोग गुजराती नहीं हैं. वे मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से आए हैं. तो गुजरातियों और साणंद के लोगों के लिए नौकरी कहां है? कुछ ही क्षेत्रीय लोगों को नौकरी मिली है. इससे क्षेत्रीय और बाहरी लोगों में विवाद की स्थिति बन गई. साणंद में कई छोटे विवाद भी हुए.

ऐसे में राहुल गांधी जब कहते हैं कि प्लांट से गुजरात को खास फायदा नहीं हुआ तो वह पूरी तरह से गलत नहीं हैं.

Courtesy: News18

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