गुजरात में ‘चुनाव आयोग’ बना भाजपा का मुखौटा, राहुल के इंटरव्यू पर रोक लेकिन करोड़ों के विज्ञापन पर कुछ नहीं

गुजरात में ‘चुनाव आयोग’ बना भाजपा का मुखौटा, राहुल के इंटरव्यू पर रोक लेकिन करोड़ों के विज्ञापन पर कुछ नहीं

गुजरात में दूसरे यानी अंतिम चरण का मतदान शुरू हो चुका है। जाहिर सी बात है मतदान शुरू हो गया है तो प्रचार भी बंद ही हो गया होगा! क्योंकि मतदान के 48 घंटे पहले ही आचार संहिता लागू हो जाती है जिसके तहत वोट मांगना, प्रचार करना कानून अपराध होता है।

लेकिन शायद चुनाव आयोग का आचार सहिंता बीजेपी पर लागू नहीं होता। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि आज गुजरात के लगभग सभी प्रमुख दैनिक अखबरों में बीजेपी ने आधे-आधे पन्नों का विज्ञापन दिया है।

इन विज्ञापनों में बीजेपी को वोट देने की अपील की गई है। साथ में बीजेपी के पोस्टर बॉय नरेंद्र मोदी की बड़ी सी तस्वीर और कमल का निशान बना हुआ है। हालांकि विज्ञापन कांग्रेस के भी छपे हैं लेकिन कम अखबारों में और छोटे साइज में।

इंंडिया टूडे के Deputy Editor कमलेश सूत्रा ने अपने एक ट्विट में इन विज्ञापनों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि ”गुजरात के सभी अखबार में बीजेपी के विज्ञापनों की बंबारी”

 

बता दें कि कल चुनाव आयोग ने कल (बुधवार) कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इंटरव्यू को टीवी पर प्रसारित करने से रोक दिया। चुनाव आयोग के मुताबिक इंटरव्यू दिखाने को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में लिखा है, ”गुजरात चुनाव में दूसरे दौर के मतदान से पहले कुछ टीवी चैनलों पर कांग्रेस के स्टार प्रचारक और नेता राहुल गांधी का इंटरव्यू दिखाया जा रहा है।”

”इस इंटरव्यू में राहुल गांधी गुजरात विधानसभा चुनाव की बातें कर रहे हैं, इस इंटरव्यू का प्रसारण उन जगहों पर भी हो रहा हैं जहां गुरुवार को दूसरे दौर का मतदान होना है, इसलिए इसे प्रसारित करना आचार संहिता का उल्लंघन है और यह जनप्रतिनिधित्व क़ानून 1951 की धारा 126(3) के तहत आता है।”

अब सवाल उठता है कि अगर इंटरव्यू देना जनप्रतिनिधित्व क़ानून 1951 की धारा 126(3) तहत आचार संहिता का उल्लंघन है तो विज्ञापन के माध्यम से वोट मांगना क्या है? ये आचार संहिता का उल्लंघन है या नहीं? क्या चुनाव आयोग को ये विज्ञापन नहीं दिखे? अगर चुनाव आयोग का यही रवैया है तो उसके विश्वसनीय पर सवाल क्यों न उठे?

 

Courtesy: boltahindustan

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