अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका : खुदरा महंगाई दर 15 महीने के उच्च स्तर पर, सुस्त हुआ औद्योगिक विकास

अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका : खुदरा महंगाई दर 15 महीने के उच्च स्तर पर, सुस्त हुआ औद्योगिक विकास

गुजरात चुनाव के नतीजों से देश को क्या खबर मिलती है, इसके लिए 18 दिसंबर तक इंतजार करना पड़ेगा, लेकिनआर्थिक मोर्चे पर जो खबर आई है, उसने देश को लोगों को तगड़ा झटका दिया है।

चुनावी मौसम में ही भारतीय अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका लगा है। खुदरा महंगाई दर 15 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, तो औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती नजर आ रही है। इससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा और रोजगार के मौके कम होंगे।

सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 3.58 फीसदी से बढ़कर 4.88 फीसदी हो गई। यह दर पिछले 15 महीनों में सबसे ऊंचे स्तर पर है। दूसरी तरफ नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है। औद्योगिक उत्पादन यानी आईआईपी दर 2.2 फीसदी रही है, जो पिछले महीने में 3.8 फीसदी थी।

महीने दर महीने आधार पर देखें तो नवंबर में शहरी इलाकों की महंगाई दर 3.81 फीसदी से बढ़कर 4.9 फीसदी रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों की महंगाई दर 3.36 फीसदी से बढ़कर 4.79 फीसदी पहुंच गई है।

महीने दर महीने आधार पर नवंबर में दालों की महंगाई दर -23.13 फीसदी के मुकाबले -0.76 फीसदी रही है। नवंबर में सब्जियों की महंगाई दर 6.89 फीसदी रही है।

महंगाई दर का यह आंकड़ा आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के 4 फीसदी के मध्यावधि लक्ष्य से कहीं अधिक है। महंगाई दर बढ़ने से रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी कम हो गई है। पिछली मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, जिसे लेकर उद्योग जगत में निराशा का माहौल बना था।

महंगाई दर में इजाफे का कारण खाने-पीने की चीज़ों के ऊंचे दामों को माना जा रहा है। सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि नवंबर के महीने में खाने-पीने के सामान की खुदरा महंगाई दर 4.42 फीसदी रही, जबकि अक्टूबर में ये 1.9 फीसदी थी। सिर्फ सब्जियों की बात करें तो नवंबर के महीने में खुदरा महंगाई दर 22.48 फीसदी रही, जबकि फलों की महंगाई दर 6.19 फीसदी रही। चीनी की मिठास पर भी महंगाई की कड़वाहट नजर आई। नवंबर के महीने में चीनी और कनफेक्शनरी के लिए खुदरा महंगाई दर 7.8 दर्ज की गयी। चीनी में लगातार तेजी बनी हुई है और आगे भी इसमें कमी के आसार दिख नहीं रहे हैं।

दूसरी तरफ औद्योगिक विकास सुस्त होने का कारण विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन है। विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग के बढ़ने की दर 2.5 ही दर्ज की गयी, जबकि सितंबर के महीने मे ये 3.8 फीसदी थी। मैन्युफैक्चरिंग की सुस्त रफ्तार रोजगार के मौकों पर असर डालती है, क्योंकि यहां अगर किसी एक व्यक्ति को सीधे रोजगार मिलता है, तो कम से कम से चार लोगो को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।

Courtesy: navjivanindia

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