हंगामे के साथ होगी संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत, चढ़ा रहेगा सियासी पारा

हंगामे के साथ होगी संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत, चढ़ा रहेगा सियासी पारा

नई दिल्ली। इस बार संसद का शीतकालीन सत्र भले 14 कार्यदिवस में समाप्त हो जाए लेकिन इसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। विपक्षी पार्टियां सरकार को राफेल, अर्थव्यवस्था पर जीएसटी और नोटबंदी के बुरे प्रभाव, किसानों की दुर्दशा व धार्मिक असिहष्णुता पर घेरने की तैयारी में हैं। गुजरात चुनाव की वजह से देरी से शुरू हो रहे सत्र पर गुजरात व हिमाचल प्रदेश के नतीजे का भी असर होगा।

विपक्षी पार्टी ऐसे मुद्दे उठा सकती है, जो राजनीतिक तापमान बढ़ाएंगे

अगर भाजपा गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज करती है तो कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर भाजपा को घेरना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन अगर कांग्रेस हिमाचल में हारने के बाद भी गुजरात में जीत दर्ज करती है तो, विपक्षी पार्टी ऐसे मुद्दे उठा सकती है, जो राजनीतिक तापमान बढ़ाएंगे। एक माह तक चलने वाला शीतकालीन सत्र प्राय: नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है।

इस वर्ष शीत सत्र 15 दिसंबर से पांच जनवरी तक चलेगा

इस वर्ष शीत सत्र 15 दिसंबर से पांच जनवरी तक चलेगा। क्रिसमस की वजह से 25 व 26 दिसंबर को छुट्टी रहेगी। कांग्रेस की अगुवाई में 17 अन्य विपक्षी पार्टियां एक साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी। तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने कहा, इस बार जीएसटी व नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव, धार्मिक असहिष्णुता, राजस्थान में पश्चिम बंगाल के मजदूर का मारा जाना जैसे बड़े मुद्दे संसद में उठाए जाएंगे।

सरकार के सामने कई अहम बिल को पास कराने की चुनौती है

वहीं, सरकार के सामने कई अहम बिल को पास कराने की चुनौती है। सरकार की कोशिश होगी कि तीन तलाक से संबंधित बिल इसी सत्र में पेश कर उसे पारित कराया जाए। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी इसका संकेत दे चुके हैं।

Courtesy: puridunia

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