2G केस में फैसले के बाद BJP के सामने साख का संकट

2G केस में फैसले के बाद BJP के सामने साख का संकट

लोगों में धारणा यह है कि मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार टेलिकॉम घोटाले के कारण सबसे भ्रष्ट थी और उसके कारण सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ था। हालांकि, सीबीआई के एक स्पेशल कोर्ट द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में सभी अभियुक्तों के बरी किए जाने के बाद इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 2जी आवंटन मामले को सबसे बड़ा घोटाला बताकर और पिछली यूपीए सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सत्ता में आने के साढ़े तीन साल बाद कोर्ट ने मामले को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी शख्स कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूतों के साथ उसके सामने पेश नहीं हुआ।
ह न सिर्फ सीबीआई, बल्कि मीडिया पर भी सवाल खड़े करता है, जिसने चुनिंदा लीक्स और आधे-अधूरे नतीजों पर अपना ट्रायल किया। बीते गुरुवार को आए फैसले से राजनीतिक परिदृश्य बदल सकता है। फैसले की टाइमिंग काफी अहम है। यह प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में चुनावी जीत के कुछ दिनों के बाद आया है। साथ ही, 2018 में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है, जहां बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। यह 2019 की बड़ी चुनावी लड़ाई के लिए भी माहौल तैयार करेगा, जब देश में अगले आम चुनाव होंगे।
2जी मामले में फैसले का असर दोतरफा होगा। यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका है, जिसका भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस के खिलाफ कैंपेन अब शायद उतना कारगर नहीं हो सके। साथ ही, यह कांग्रेस के लिए नैतिक जीत की तरह है, जो 2019 के लिए मोदी-विरोधी मोर्चा बनाने की खातिर छोटी पार्टियों के पास पहुंच सकती है। इस फैसले में बीजेपी के भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे को जड़ से उखाड़ने की क्षमता है, जो उसने 2जी घोटाले को मुख्य मुद्दा बनाते हुए तैयार किया था। इस मुद्दे पर पार्टी लोकसभा चुनाव जीत गई और इसका इस्तेमाल अगले चुनाव के लिए किया जा रहा था। बीजेपी की तरफ से जनता को कांग्रेस की पिछले कुछ दशक की गड़बड़ियों की अक्सर दुहाई दी जाती थी। यह मुद्दा क्षतिग्रस्त हो चुका है और अब बीजेपी को कांग्रेस पर हमले के लिए कोई और हथियार ढूंढना होगा। अब यह खुलेआम चिल्ला-चिल्लाकर यह नहीं कह सकती कि देश की सबसे पुरानी पार्टी ने देश को 70 सालों तक लूटा और वह इससे बच निकलती रही।
बीजेपी के लिए जज की तरफ से इस्तेमाल की गई सख्त भाषा भी चिंता की बात है। जज ने अफवाह, कही-सुनी बातों और अटकलों को लेकर लोगों में बनाई गई राय पर काफी नाराजगी जताई और अभियोजन पक्ष से कहा कि न्यायिक कार्यवाही में ‘अवधारणाओं या लोगों की राय’ के लिए कोई जगह नहीं है। भ्रष्टाचार के मामलों में कांग्रेस और कई विपक्षी नेताओं का नाम घसीटने की कोशिशों को लेकर जज की चेतावनी के गंभीर मायने हैं। हर केस के लिए ठोस आधार होना चाहिए और न्यायिक पड़ताल में इसके खरा उतरने के लिए उचित सबूत होना चाहिए। विपक्षी नेताओं के खिलाफ कुछ बीजेपी नेताओं के ट्वीट, सोशल मीडिया पोस्ट और चुनिंदा लीक्स अक्सर झूठ निकल जाती हैं।
इस फैसले को मौजूदा विवाद के संदर्भ में भी देखा जाएगा, जो गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व पीएम पर लगाए गए आरोपों को लेकर चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया था कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर बीजेपी को हराने की साजिश कर रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस की माफी की मांग से निपटने के लिए और तिकड़म लगाना होगा। कांग्रेस और उसके नए चुने गए अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए असली चुनौती अपनी इस ‘बढ़त’ को अहम बनाने में होगी, जिससे उनकी किस्मत बदल सकती है।

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