महाराष्ट्रः कर्जमाफी की घोषणा के बाद भी 1,497 किसानों ने की आत्महत्या

महाराष्ट्रः कर्जमाफी की घोषणा के बाद भी 1,497 किसानों ने की आत्महत्या

महाराष्ट्र में पिछले 6 महीने में 1,497 किसानों ने आत्महत्या कर ली। कर्ज में डूबे इन किसानों की आत्महत्या के ये सरकारी आंकड़े तब से हैं जबकि जून महीने में सरकार ने किसानों की कर्जमाफी योजना शुरू की थी। पिछले साल इन्हीं 6 महीनों में 1,563 किसानों ने आत्महत्या की थी।

हालांकि इन आंकड़ों की तुलना करें तो किसानों की कर्जमाफी के बाद किसानों की आत्हत्या के आंकड़ों में मात्र 4.2 फीसदी कमी आई है। किसानों की कर्जमाफी के लिए होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया में कमी के चलते सत्यापन देरी से हो पाता है। महाराष्ट्र सरकार ने 41 बैंक खातों में 19,537 करोड़ रुपये जमा किए जाने का बात कही है। हालांकि भुगतान की गति बहुत धीमी है और किसानों के खातों में धन भेजे जाने का काम अब भी चल रहा है।

विदर्भ में सबसे अधिक किसानों ने दी जान

अगर इस साल जनवरी से लेकर नवंबर तक की बात करें तो अब तक कुल 2,662 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले साल कुल 2,858 किसानों ने आत्महत्या की थी। पिछले वर्ष से तुलना करें तो इस साल किसानों के आत्महत्या करने के आंकड़ों में सिर्फ 6.8 फीसदी कमी आई है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विदर्भ क्षेत्र के रहने वाले हैं। इस क्षेत्र की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा किसानों के आत्महत्या करने की घटनाएं हुईं। यहां जनवरी से नवंबर तक 1,240 किसानों ने आत्महत्या की। ये आंकड़े पूरे प्रदेश किसानों की आत्महत्या के कुल आंकड़ों का 46.5 फीसदी है।

इस साल महाराष्ट्र के विदर्भ में कपास की खेती करने वाले किसानों की खेती बड़े स्तर पर कीटों के हमले का शिकार हुई। इससे उनकी फसल घटकर आधी हो गई। यहां तक कि 51 किसानों की खेतों में जहरीले कीटनाशक छिड़कने के कारण मौत हो गई।

खुदकुशी की मुख्य वजह

प्रदेश सरकार की कर्जमाफी योजना भी किसानों के आत्महत्या के आंकड़ों में कमी नहीं ला सकी। हालांकि किसानों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या फसल की कम कीमत मिलना है। किसानों का फसल पर खर्च बढ़ रहा है लेकिन उन्हें उनके सही दाम नहीं मिल रहे हैं। सरकार इस मुद्दे पर काम नहीं कर रही है।

किसानों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता ने बताया कि सरकारी की कर्जमाफी लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रही है। बड़ी संख्या में किसानों का अभी तक सत्यापन का काम ही चल रहा है। किसान सभा के अजीत नावाले ने बताया कि बहुत सारे किसानों की अभी तक कर्जमाफी नहीं हुई है। दूसरी तरफ उनकी फसल पर कीटों के हमले से उनकी बर्बाद हुई फसलों से जूझ रहे हैं। सरकार उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है।

Courtesy: NavbharatTimes

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