केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 700 गुना बढ़ गई कश्मीर में युवाओं के आतंकी बनने की संख्या

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 700 गुना बढ़ गई कश्मीर में युवाओं के आतंकी बनने की संख्या

केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद से कश्मीर में हर साल आतंक की राह पकड़ने वाले युवाओं की तादाद में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2013 में सिर्फ 16 युवा आतंकी बने थे, जो इस साल बढ़कर 117 हो गए ।

नरेंद्र मोदी सरकार एक-एक कर हर मोर्चे पर नाकाम होती नजर आ रही है। साथ ही उसकी कश्मीर नीति की भी पोल खुलने लगी है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कश्मीर में युवाओं के आतंकी संगठनों से जुड़ने की रफ्तार में जबरदस्त तेजी आई है। इस साल तो यह तादाद पिछले सात साल के रिकॉर्ड को पार कर गई है।

इस साल नवंबर तक 117 युवाओं ने अलग-अलग आतंकी संगठनों का दामन थामा है, जबकि 2014 में आतंक की राह पकड़ने वाले युवाओं की संख्या 16 थी।

मोदी सरकार का दावा है कि नोटबंदी के बाद आतंकवाद पर लगाम लगी है। इसके अलावा ऑपरेशन ऑल आउट चलाकर भी आतंकवाद पर लगाम लगाने के दावे किए जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक ऑपरेशन ऑल आउट में 205 आतंकियों की मौत हो चुकी है। साथ ही आतंकी फंडिंग के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की कार्रवाई भी जारी है। लेकिन ये सारे कदम नाकाम साबित हुए हैं और स्थानीय युवकों के आतंकी संगठनों में लगातार बढ़ रही भर्ती रोक पाने में असफल रहे हैं।

इस साल कश्मीर में 100 से ज्यादा स्थानीय युवक अलग-अलग आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं जो बीते सात वर्षो में सबसे ज्यादा है। सूत्रों की मानें तो 2016 में जब पूरे कश्मीर में कानून व्यवस्था का संकट पैदा था, तो गली-मुहल्लों में हो रहे राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों में आतंकी खुलेआम नजर आते थे। तब 88 स्थानीय युवक ही आतंकी बने थे। लेकिन, 2017 में पहली जनवरी से नवंबर के समाप्त होने तक 117 स्थानीय युवक आतंकी बने हैं। सात युवक दिसंबर के दौरान आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अनंतनाग से 12, पुलवामा से 45, शोपियां से 24 और कुलगाम से 10 युवकों ने आतंकी संगठनों का दामन थामा है। उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा से चार, बारामुला व सोपोर से छह युवक आतंकी बने हैं। बांदीपोर के सात युवकों ने आतंक की राह पकड़ी है। श्रीनगर जिले से पांच युवक घरों से गायब होकर आतंकियों से जुड़े हैं। बड़गाम जिले में चार युवक आतंकी बने हैं।2010 से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वर्ष 2017 में आतंकी संगठनों को नए लड़कों की पौध तैयार करने में कोई दिक्कत नहीं हुई है।

2010 में 54 और 2011 में 23 स्थानीय युवक आतंकी बने थे। 2012 में 21 और 2013 में 16 युवकों ने आतंक की राह पकड़ी थी।

लेकिन केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 2014 में स्थानीय युवकों के आतंकी संगठनों में भर्ती होने की प्रक्रिया तेज हो गई। 2014 में 53 स्थानीय लड़के आतंकी बने थे। 2015 में 66 स्थानीय युवक विभिन्न आतंकी संगठनों का हिस्सा बने।

उधर राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. एसपी वैद दावा करते हैं कि इस साल कश्मीर में आतंकवाद का रास्ता चुनने वाले स्थानीय युवकों की संख्या 100 से कहीं कम है। वहीं 80 युवकों को आतंकी बनने से रोका गया है। आठ से 10 युवकों ने बंदूक को नमस्ते कर मुख्यधारा की राह पकड़ी है। राज्य पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पुलिस सिर्फ उन्हीं मामलों का संज्ञान लेती है, जिनमें किसी युवक के घर से गायब होने पर उसके परिजन पुलिस में शिकायत करते हैं। उस शिकायत की छानबीन में अगर युवक के आतंकी बनने का पता चले तो मान लिया जाता है कि वह आतंकी है।

इसके अलावा सरकार का यह दावा भी गलत ही साबित हुआ है कि नोटबंदी से आतंकी गतिविधियों में कमी आई है। सरकार ने संसद में खुद माना है कि पिछले साल के मुकाबले कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं।

लोक सभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक जम्मू एवं कश्मीर में 1 नवंबर 2015 से 31 अक्टूबर 2016 के बीच 311 आतंकवादी घटनाएं हुईं, वहीं 1 नवंबर 2016 से 31 अक्टूबर 2017 के बीच जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं की संख्या 341 हो गई।

गृह मंत्रालय का लिखित जवाब में यह कहना है कि आतंकवाद कम हुआ है लेकिन आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है।

Courtesy: Navjivan India

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