नितिन पटेल के दबाव के आगे भाजपा का झुकना बताता है कि गुजरात में वह किस हाल में पहुंच गई है

नितिन पटेल के दबाव के आगे भाजपा का झुकना बताता है कि गुजरात में वह किस हाल में पहुंच गई है

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का दबाव रंग लाया. अपने पसंदीदा विभाग न मिलने की वजह से उन्होंने कार्यभार संभालने से इंकार कर दिया था. नतीजा ये हुआ कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को झुकना पड़ा. और उन्हें उनका पसंदीदा वित्त विभाग भी लौटाना पड़ा. हालांकि इससे यह संकेत भी मिला कि गुजरात में भाजपा इन दिनों किस हाल से गुजर रही है.

ख़बरों के मुताबिक़ शाह और रूपाणी के मनाने और वित्त विभाग मिलने के बाद नितिन पटेल ने पदभार ग्रहण कर लिया. इससे पहले मुख्यमंत्री रूपाणी ने घोषणा की कि भाजपा नेतृत्व के फ़ैसले के अनुसार वित्त विभाग राज्य सरकार के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री सौरभ पटेल से लेकर नितिन पटेल को सौंप दिया गया है. इस बाबत राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली को भी सूचना भिजवा दी गई है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले की सरकार में नितिन के पास वित्त, शहरी विकास और पेट्रोकैमिकल्स जैसे विभाग थे. लेकिन इस बार मुख्यमंत्री रूपाणी ने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वित्त और पेट्रोकैमिकल्स विभाग सौरभ पटेल को सौंप दिए. जबकि शहरी विकास विभाग अपने पास रखा. दूसरी तरफ़ नितिन पटेल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सड़क निर्माण, नर्मदा जैसे विभाग सौंप दिए थे.

इससे नितिन नाराज़ हो गए. उन्होंने दो दिन तक अपना पदभार नहीं संभाला. बल्कि पटेल समुदाय के तमाम नेताओं से मेल-मुलाक़ात करते रहे. इनमें भाजपा के साथ विपक्षी कांग्रेस के नेता भी शामिल थे. पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक ने तो उन्हें यहां तक पेशकश कर दी थी कि वे ‘भाजपा के 10 विधायक तोड़ लाएं. उन्हें कांग्रेस से उचित सम्मान दिलाया जाएगा.’ इससे भाजपा दबाव में आ गई.

भाजपा का दबाव में आना लाज़िमी भी था. क्योंकि हाल में ही हुए विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूरा जोर लगाने के बावजूद पार्टी राज्य में सिर्फ़ 99 सीटें ही जीत सकी. जबकि पिछली बार उसकी 115 सीटें थीं और इस बार उसने अपने लिए 150 सीटों का लक्ष्य रखा था. लेकिन कांग्रेस की घेराबंदी से उसका मंसूबा ध्वस्त हो गया.

Via: Scroll

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