किसी सरकारी एजेंसी को भी आधार नंबर देने की जरूरत नहींः UIDAI सीईओ

किसी सरकारी एजेंसी को भी आधार नंबर देने की जरूरत नहींः UIDAI सीईओ
नई दिल्ली
आप चाहें तो अपना 12 अंकों का आधार नंबर कभी किसी सरकारी एजेंसी को भी नहीं दे सकते हैं। यह कहना है आधार की संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के एक टॉप अधिकारी का।बुधवार को यूआईडीएआई ने भारतीय नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारियों के डेटाबेस की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में विभिन्न कदमों का ऐलान किया था।

यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पाण्डेय ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा, ‘यहां तक कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट या अन्य उन एजेंसियों को भी अपना आधार नंबर नहीं देना होगा जिन्हें कानूनी रूप से आधार की जानकारी देने की जरूरत है। लोग वर्चुअल आईडी के इस्तेमाल से इन एजेंसियों में अपने आधार नंबर ऑथेंटिकेट कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि यह नया नियम इस साल जून महीने से लागू हो जाएगा।


यूआईडीएआई सीईओ ने बताया, ‘अगर कस्टमर अपनी मर्जी से आधार नंबर नहीं देगा तो यह ऑथेंटिकेशन का प्रमुख स्रोत नहीं बनेगा।’ यहां तक कि ऑनलाइन टैक्स रिटर्न्स फाइल करने जैसे कामों में भी आधार की जगह वर्चुअल आईडी नंबर देकर काम चलाया जा सकता है।

8 साल पुरानी एजेंसी यूआईडीएआई ने सबसे महत्वपूर्ण सिक्यॉरिटी अपग्रेड के तहत ‘वर्चुअल आईडी’ तैयार करने का ऐलान किया जिसे किसी सर्विस के लिए ऑथेंटिकेशन के वक्त 12 अकों के आधार नंबर की जगह इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसमें ऑथेंटिकेशन एजेंसी को लोगों की बहुत कम जानकारी मिल पाएगी। लोगों पास यह विकल्प भी होगा कि वह अपना वर्चुअल आईडी नहीं बनाएं और हमेशा आधार नंबर का ही उपयोग करें।

पाण्डेय ने कहा, ‘लेकिन हमने सुश्चित किया है कि वे सर्विस प्रवाइडर्स भी इनसे (वर्चुअल आईडी से) आधार ऑथेंटिकेट कर सकें जिन्हें यह जानकारी स्टोर करने की अनुमति नहीं है। इससे उनके नेटवर्क में किसी भी रूप में कोई सूचना जमा नहीं हो पाएगी।’ उन्होंने कहा कि अगर सर्विस प्रवाइडर्स आधार नंबर जानने के गलत तरीके अपनाते हैं तो इस अपराध के लिए उन्हें दंडित किया जाएगा।

बुधवार को यूआईडीएआई ने ऑथेंटिकेशन के लिए पूरे डेमोग्रैफिक डेटा तक पहुंच रोकने के मकसद से सीमित केवाइसी फीचर लॉन्च किया। यूआईडीएआई अपनी 350 से ज्यादा ऑथेंटिकेशन एजेंसियों के लिए जरूरी सूचनाओं की पुष्टि करेगी। सीईओ अजय भूषण पाण्डेय ने कहा, ‘हम उन्हें पूछेंगे कि किस कानून के तहत वे केवाइसी के लिए कह रहे हैं। आखिरकार सरकार और कानून तय करेंगे कि किस सर्विस प्रवाइडर को कितना डेटा दिया जाना जरूरी है। अगर किसी एजेंसी को सिर्फ नाम और पता चाहिए तो उन्हें ज्यादा जानकारी क्यों दी जाए?’

यूआईडीएआई अगले कुछ हफ्तों पर इस विचार बहस करती रहेगी और मार्च तक अपना सिस्टम भी तैयार कर लेगी। पाण्डेय ने बताया, ‘1 जून तक सभी ऑथेंटिकेशन एजेंसियों को नई पद्धति अपनानी होगा। अगर वे नया सिस्टम नहीं अपनाएंगे तो उनका लाइसेंस वापस ले लिया जाएगा और उन्हें दुबारा लाइसेंस तभी मिलेगा जब वे नया सिस्टम तैयार कर लेंगे।’

Courtesy: NBT
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