मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ की हकीकत, 14.88 अरब डॉलर पर पहुंचा देश का व्यापार घाटा, 3 साल में सबसे ज़्यादा

मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ की हकीकत, 14.88 अरब डॉलर पर पहुंचा देश का व्यापार घाटा, 3 साल में सबसे ज़्यादा

ख़राब स्तिथि में चल रही भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापर घाटे का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। दिसम्बर 2017 में व्यापर घाटा तीन साल के उच्चतम स्तर पर चला गया है। वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में व्यापार घाटा 14.88 अरब डॉलर मतलब लगभग 95 हज़ार करोड़ हो गया है।

क्या होता है व्यापार घाटा?

किसी भी देश के आयत (Import) और निर्यात (Export) में अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। जब किसी देश का आयत बढ़ने लगता है और निर्यात घटने लगता है तो इससे नुकसान होना शुरू हो जाता है। विश्व के ज़्यादातर शक्तिशाली देश आयात के मुकाबले निर्यात ज़्यादा करते हैं। इससे उनका व्यापार मुनाफे में रहता है।

2016 दिसम्बर के व्यापर घाटे की तुलना में दिसम्बर 2017 का व्यापर घाटा 41% ज़्यादा है। इसका कारण है दिसम्बर में आयात का 41.91 अरब डॉलर मतलब लगभग 2 अलख 70 हज़ार करोड़ तक पहुँच जाना। आयात की रकम बढ़ने का एक कारण अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ना भी है।

निर्यात बढ़ा लेकिन मुश्किलें नहीं घटी

हालाँकि, इंजीनियरिंग वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों के बेहतर प्रदर्शन से देश का निर्यात दिसंबर, 2017 में 12.36 प्रतिशत वृद्धि के साथ 27.03 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

लेकिन इस दौरान सिलेसिलाए कपड़ों का निर्यात 8 प्रतिशत घटकर 1.33 अरब डॉलर रह गया। कपड़े के निर्यात का इस तरह घटना नोटबंदी और जीएसटी से व्यापर में आई परेशानियों का नतीजा है। जीएसटी लागू होने के बाद निर्यातकों की मुश्किलें भी काफी बढ़ी हैं।

एक्सपोर्टर्स जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट फंसने की वजह से वो ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि जीएसटी आने से पहले देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निर्यातकों पर टैक्स नहीं लगाया जाता था।

जीएसटी आने के बाद मोदी सरकार ने कहा कि जैसे ही किसी भी निर्यातक का सामान निर्यात हो जाएगा तो उसके सामान पर लगाया गया टैक्स उसे वापस मिल जाएगा। लेकिन जीएसटी में खामियों के चलते टैक्स निर्यातकों को वापस नहीं मिल पा रहा है जिसके कारण वो निवेश नहीं कर पा रहे हैं।

एक तरफ मोदी सरकार ‘मेक इन इंडिया’ की बात कर रही है और दूसरी तरफ आयात का इस तरह बढ़ना सरकार के दावे और हकीकत को बयान करता है।

Courtesy: boltahindustan

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