आप की मुश्किलें बढ़ी, चुनाव आयोग ने 20 विधायाकों की रद्द की सदस्यता

नई दिल्ली। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनाव आयोग आप के विधायकों पर अपना शिकंजा कस चुका है। लाभ के पद पर होने के मामले को लेकर आप के 20 विधायकों की सदस्यता चुनाव आयोग ने रद्द कर दी है। आयोग के इस फैसले पर अंतिम मोहर राष्ट्रपति लगाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली की 20 सीटों पर फिर से चुनाव कराए जाएंगे। आयोग ने इस मामले में आप के 21 विधायकों को नोटिस जारी किया था, लेकिन जरनैल सिंह पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।

चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ आप ने कहा है कि विधायकों की सदस्यता का फैसला आयोग नहीं कर सकता है। इसका फैसला कोर्ट में होगा। आप ने आयोग पर अपने विधायकों का पक्ष न सुनने का भी आरोप लगाया है।

सरकार गिरने का नहीं है कोई खतरा

यदि आप के इन विधायकों की सदस्यता रद्द भी कर दी जाती है तो भी केजरीवाल सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि 70 सदस्यीय विधानसभा में केजरीवाल के 66 विधायक हैं और यदि 20 की सदस्यता रद्द भी हो जाती है तो उसके विधायकों की संख्याि 46 रहेगी, जबकि बहुमत के लिए 36 विधायकों की जरूरत है।

आप द्वारा 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने पर खुला पूरा मामला

दिल्ली सरकार ने मार्च, 2015 में आप के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। प्रशांत पटेल नाम के शख्स ने राष्ट्रपति के पास याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ये 21 विधायक लाभ के पद पर हैं, इसलिए इनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। दिल्ली सरकार ने दिल्ली असेंबली रिमूवल ऑफ डिस्क्वॉलिफिकेशन ऐक्ट-1997 में संशोधन किया था। इस विधेयक का मकसद संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से छूट दिलाना था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नामंजूर कर दिया था। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने भी विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के फैसले का विरोध किया था, और दिल्ली हाईकोर्ट में आपत्ति जताई थी। केद्र का कहना था कि दिल्ली में सिर्फ एक संसदीय सचिव हो सकता है, जो मुख्यमंत्री के पास होगा। इन विधायकों को यह पद देने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।

Courtesy: puridunia

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