दावोस में मोदी ‘न्यू इंडिया’ का दावा का रहे हैं, इधर देश में गौरक्षक और करणी सेना हमें सदियों पीछे ले जा रहे हैं

दावोस में मोदी ‘न्यू इंडिया’ का दावा का रहे हैं, इधर देश में गौरक्षक और करणी सेना हमें सदियों पीछे ले जा रहे हैं

स्विटजरलैंड के शहर दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनिया भर से आए दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों और विदेशी नेताओं के जमावड़े के बीच उद्घाटन भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का खूब डंका बजाया।

प्रधानमंत्री ने भारत को एक बेहतरीन निवेश स्थल के तौर पर मार्केटिंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नए भारत के बाद प्रधानमंत्री ने नए विश्व का नारा दिया। कहा, “आइए हम मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाएं, जहां सहयोग और समन्वय हो, विभाजन और दरारें न हों।”

प्रधानमंत्री ने देश की तारीफ और बड़ाई में पुल बांध दियें। प्रधनमंत्री ने कहा भारत हमेशा से दुनिया में शांति के लिए काम करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने लोगों को भारत आने का न्योता देते हुए कहा, “अगर समृद्धि और शांति चाहिए तो आप भारत आइये। भारत जोड़ने में विश्वास रखता है तोड़ने में नहीं।”

प्रधानमंत्री मोदी के 50 मिनट के हिंदी में भाषण की लोगों ने जमकर तारीफ की। प्रधानमंत्री द्वारा बताये गए भारत की खूब सराहना हुई। लेकिन असल भारत में कुछ और चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, समृद्धि और शांति चाहिए तो भारत आइए। कौन से शांति की पीएम बात कर रहें हैं, देश में तो फिलहाल एक फिल्म के नाम पर लोग तोड़फोड़ कर रहें हैं, जगह-जगह आग लगा दे रहे हैं, गाड़ियाँ तोड़ रहें हैं, धमकियां दे रहें हैं, क्या यहीं शांति है?

भारत में आए दिन लड़कियों के साथ बलात्कार हो रहें हैं, उनकी ही पार्टी की सरकार द्वारा शासित हरियाणा में लगातार बलात्कार की घटनाये सामने आ रहीं हैं। लेकिन सरकार लाचार है, क्या यहीं पीएम की समृद्धि है?

सरहद पर सैनिक रोज पकिस्तान की तरफ से हो रही गोलाबारी में शहीद हो रहें हैं, देश के सर्वोच्च न्यायलय के जज खुद आकर कहते हैं कि सब ठीक नहीं है, पर प्रधानमंत्री मोदी के नज़रों में देश में शांति है, समृद्धि है, सुख है।

खैर प्रधानमंत्री ने अपने भाषण से अपने सपनो के न्यू इंडिया का विवरण देकर खूब तालियां बटोर ली औ अपना फर्ज़ पूरा कर लिया है, अब भारत की तथाकथित 600 करोड़ जनता और क्या चाहती है?

Courtesy: boltahindustan.

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