बजट 2018: चुनाव से पहले सब्सिडी का ट्रंप कार्ड चलेगी मोदी सरकार?

बजट 2018: चुनाव से पहले सब्सिडी का ट्रंप कार्ड चलेगी मोदी सरकार?
नई दिल्ली
चुनाव से पहले तमाम तरह की सब्सिडीज का ऐलान करने की आमतौर पर सभी सरकारों में परंपरा रही है। हर सरकार के वित्त मंत्री आम लोगों को आकर्षित करने के लिए लुभावने ऐलान करते रहे हैं, सरकारें सब्सिडी को ट्रंप कार्ड के तौर पर इस्तेमाल करती रही हैं। 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने इससे थोड़ा अलग रुख अपनाया है और अब तक बड़े पैमाने पर सब्सिडीज का ऐलान करने से परहेज किया है। ऐसे में इस बजट में यह देखने वाली बात होगी कि सरकार सब्सिडी के मोर्चे पर क्या कदम उठाती है।
कुल खर्च में सब्सिडी का प्रतिशत 2014-15 के 15.52 फीसदी आंकड़े की तुलना में 2017-18 में 11.2 पर्सेंट हो गया। सब्सिडी का शेयर 2012-13 में सबसे अधिक हो गया था, जबकि यूपीए सरकार को 2014 में जनादेश का सामना करना था। हालांकि गुजरात के चुनावों के बाद अरुण जेटली इस बजट में दूसरा रास्ता चुन सकते हैं। गुजरात के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी के समर्थन में बड़ी कमी आई है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे चुनावी राज्यों में भी 2019 के आम चुनाव से पहले किसानों के आंदोलन देखने को मिले हैं।

यदि सरकार ग्रामीण सेक्टर में सब्सिडीज पर ध्यान देती है तो इस बात की संभावना है कि ‘ऐग्रिकल्चर’ शब्द एक बार फिर से बजट स्पीच में टॉप पर होगा। 1960 के मध्य तक बजट भाषमों में ऐग्रिकल्चर शब्द का इस्तेमाल कम ही होता था। इसमें बदलाव तब आया, जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने और उन्होंने 1965 में ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया। हालांकि इसके बाद भी इस सदी की शुरुआत तक ऐग्रिकल्चर को बजट में बहुत ज्यादा तवज्जो आमतौर पर नहीं मिलती थी।

इसकी बजाय वित्त मंत्रियों के शब्दकोष में कृषि की बजाय ग्रामीण सेक्टर जैसा शब्द छाया रहा। मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की बात कही है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि एनडीए राज में भी किसानों को सब्सिडी देने की परंपरा को आगे बढ़ाया जाए।

Courtesy: NBT
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