बंदूक की भाषा समझने वालों को उसी तरह मिले जवाब: योगी

बंदूक की भाषा समझने वालों को उसी तरह मिले जवाब: योगी

गोरखपुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग समाज का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं और बंदूक की भाषा समझने वालों को उसी तरह से जवाब दिया जाना चाहिए.

बीते बृहस्पतिवार को योगी ने कहा, ‘सुरक्षा की गारंटी हर व्यक्ति को मिलनी चाहिए लेकिन जो लोग समाज का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं, जिन लोगों को बंदूक की नोंक पर विश्वास है, उन्हें बंदूक की भाषा में ही जवाब भी दिया जाना चाहिए. ये मैं प्रशासन से कहूंगा कि इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है.’

उन्होंने सपा पर हमला करते हुए कहा, ‘लाल टोपी पहनकर किसी को भी अराजकता फैलाने की छूट नहीं दी जा सकती है. संसदीय मर्यादा तार-तार करने की छूट नहीं दी जा सकती… मैं सलाह दूंगा कि समय रहते सुधरें नहीं तो प्रदेश की जनता उन्हें सुधार ही रही है.’

इससे पहले लखनऊ में योगी ने संवाददाताओं से कहा, ‘विपक्षी नेताओं का अशिष्ट, असंसदीय, अभद्र और अशोभनीय आचरण निंदनीय है.’

उन्होंने कहा कि इस तरह के आचरण से संसदीय परंपरा टूटती है. कागज के गोले फेंके गए, गुब्बारे उड़ाए गए. सपा के सदस्यों ने अपने नेताओं की मौज़ूदगी में राज्यपाल के लिए अनुचित भाषा का प्रयोग किया. यह असंसदीय आचरण है और निंदनीय कृत्य भी.

योगी ने कहा कि यह आचरण अराजकता का संकेत देती है, जो राज्य में पूर्व के शासन में था.

उन्होंने कहा, ‘इन लोगों (सपा) को अराजकता की मनोवृत्ति से बाहर आना बाकी है, जिसकी अनुमति उन्होंने राज्य में दी थी… वे नहीं चाहते कि सदन अराजकता से मुक्त हो.’

बता दें कि बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र काफी हंगामेदार रहा. विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने पर राज्यपाल राम नाईक द्वारा विधानसभा और विधानपरिषद सदस्यों को संबोधित करने के दौरान विपक्ष के नेताओं ने उन पर काग़ज़ के गोले फेंके और गुब्बारे उड़ाए.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यपाल ने आधे घंटे तक सदन को संबोधित किया इस दौरान प्रदेश के आलू किसानों की समस्याओं को याद दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी के विधायक आलू की माला पहन कर बैठे हुए थे.

सदन में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए विपक्ष के नेता प्लेकार्ड लिए हुए थे, जिसमें फ़र्ज़ी मुठभेड़, मुस्लिमों की प्रताड़ना, कासगंज हिंसा और सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी गिरफ्तारियों के संबंध में स्लोगन लिखे हुए थे. इसमें लिखा था, ‘निर्दोषों का फ़र्ज़ी एनकाउंटर बंद करो’, ‘मुसलमानों का उत्पीड़न बंद करो’ और ‘कासगंज के सांप्रदायिक हिंसा में निर्दोष लोगों पर ज़ुल्म बंद करो’.

इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ के पिछले साल मार्च में सत्ता संभालने के बाद उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने वालों की संख्या 38 हो गई है.

डीजीपी मुख्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल 20 मार्च से इस साल 31 जनवरी के बीच उत्तर प्रदेश में 1,142 एनकाउंटर हो चुके हैं.

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 31 जनवरी से अब तक मुठभेड़ में चार लोग मारे जा चुके हैं और 265 लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा अब तक 2,744 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. इन मुठभेड़ों में 247 पुलिसकर्मी घायल हुए.

विपक्ष ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि इन मुठभेड़ों में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं.

बहरहाल, मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के भवन और कलेसर से नौसड़ चौराहा तक एलईडी रोड लाइट का उद्घाटन किया. उन्होंने ज़िले में सहजनवा क्षेत्र के हरदी गांव में सरकारी पॉलीटेक्निक की आधारशिला भी रखी.

योगी ने कहा, ‘विकास ही संपन्नता का एकमात्र रास्ता है. पॉलीटेक्निक चालू होने के बाद युवाओं को अपने क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा का अवसर मिलेगा. यदि हम गांवों से पलायन रोकना चाहते हैं तो हमें गांवों का विकास करना होगा.’

उन्होंने कहा कि पूर्व की प्रदेश सरकारें तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति करती थीं. सपा सरकार की बूचड़खानों में ज़्यादा रुचि थी और हम विकास में रुचि रखते हैं. जिस जगह सपा सरकार बूचड़खाना खोलना चाहती थी, हम वहां विकास के द्वार खोलेंगे.

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