जींद रैली में BJP कार्यकर्ताओं ने दी अपनी सरकार को नसीहत, कहा बहुत हो गया इन्तजार?

जींद रैली में BJP कार्यकर्ताओं ने दी अपनी सरकार को नसीहत, कहा बहुत हो गया इन्तजार?

चंडीगढ़: भाजपा की जींद रैली फेल होने के बाद जहां मंत्री विधायक कल देश शाम अपने घर पहुँच आराम से सो गए वहीं संघ के लोग पूरी रात सो नहीं पाए और मनन करते रहे कि आखिर ऐसा क्यू हुआ? संघ के एक नेता ने बताया कि अब राज्य सरकार को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना पड़ेगा क्यू कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने साढ़े तीन साल लम्बा इन्तजार किया है और अब तक उनकी झोली खाली है। उन्हें कहीं भी नहीं पूंछा जाता इसलिए कल ऐसे कार्यकर्ताओं ने रैली का बहिष्कार कर अपनी ही सरकार को आइना दिखाया। संघ के नेता का कहना है कि यही कार्यकर्ता जनता को घरों से निकालकर बूथों तक ले जाते हैं, पार्टी को वोट दिलवाते हैं लेकिन जब ऐसे कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के छोटे से काम के लिए किसी विधायक मंत्री के पास जाते हैं तो उनके साथ अच्छा व्योहार नहीं किया जाता, उन्हें भिखारी समझा जाता है।

रैली के ठीक पहले जाटों ने जो धमकियां दीं थीं उसका भी असर रैली पर पड़ा माना जा रहा है कि कहीं न कही भाजपा से जुड़े वर्करों व आम लोगों के मन में यह आशंका थी कि रैली के दौरान थोड़ी कहासुनी भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए बड़ी संख्या में वर्करों ने रैली से दूरी ही बनाए रखी। अगर सरकार से जुड़े लोगों की ही मान लें तो इस रैली के लिए दूर-दराज के जिलों और हलकों के वर्कर तो 14 की रात ही जींद के आसपास पहुंच गए थे।

इसके बाद भी रैली स्थल का नहीं भर पाना बड़े सवालों को जन्म दे रहा है। सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर आम वर्कर ही नहीं मंत्रियों व विधायकों में भी असंतोष कई बार जगजाहिर हो चुका है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से जब रैली में कम भीड़ को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब था, जब वर्करों की सुनवाई ही नहीं होगी तो वे कब तक भीड़ जुटाएंगे। साढ़े 3 वर्षों का कार्यकाल इंतजार के लिए कम नहीं होता।
एक नेता ने कहा, अगर सरकार के कर्ता-धर्ताओं ने अब भी अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो आने वाले समय में दिक्कत और बढ़ सकती है। वर्करों में अगर मनोबल होगा और उनकी सुनवाई होगी तो वे आम लोगों को घरों से निकाल कर पार्टी के कार्यक्रमों एवं रैलियों तक लेकर जाने में अहम रोल भी अदा करेंगे। भाजपाइयों में इस तरह की चर्चा भी सुनने को मिली कि सरकार और संगठन के लिए यह रैली किसी नसीहत से कम नहीं है।

Courtesy: haryanaabtak

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