PM मोदी का ‘रोज़गार’ बढ़ने का दावा झूठा साबित, EPF रिपोर्ट के मुताबिक- 1 माह में 4.50 लाख नौकरियां गई

PM मोदी का ‘रोज़गार’ बढ़ने का दावा झूठा साबित, EPF रिपोर्ट के मुताबिक- 1 माह में 4.50 लाख नौकरियां गई

रोज़गार के सवाल पर मोदी सरकार घिरती जा रही है। सरकार के अपने दिए आकड़े तक उसके खिलाफ जा रहे हैं। इम्‍पलाईज़ प्रॉविडेंट फंड यानी ईपीएफ के आंकड़ों के मुताबिक, एक माह में करीब 4.50 लाख लोगों की नौकरी चली गई।

इम्‍पलाईज प्रॉविडेंट फंड में कंपनियों का रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें कम्पनियाँ अपने कर्मचारियों का प्रोविडेंट फण्ड यानि पीएफ जमा करती हैं। इन पीएफ खातों के आधार पर ये भी पता चलता है कि बाज़ार में कितने रोज़गार बढ़े या घटे। ईपीएफ के डाटा के मुताबिक, नवंबर में इसके एक्टिव मेंबर्स की संख्या 4 करोड़ 54 लाख 96 हज़ार थी। दिसंबर में यह घटकर 4 करोड़ 50 लाख 33 हजार रह गई।

बता दें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी ईपीएफ के आधार पर ये दावा किया था कि साल 2017 में 70 लाख नौकरियों में इज़ाफा हुआ है। उन्‍होंने कहा था  “एक साल में 18 से 25 साल की उम्र के बीच युवाओं के 70 लाख पीएफ अकाउंट खुले हैं। क्‍या यह नया रोज़गार नहीं दिखाता है।”

लेकिन पीएम मोदी के इस दावे पर बहुत से सवाल उठे थे। दरअसल, पिछले साल ही सरकार ने जीएसटी लागू किया है जिसके बाद बहुत सी कंपनियों को अपना रजिस्ट्रेशन ईपीएफ में कराना पड़ा है। अब तक ये कम्पनियाँ बिना रजिस्टर हुए ही काम कर रही थी।

इसलिए जानकारों का ये कहना है कि ये तो पुरानी कंपनियों के कर्मचारी हैं जिन्हें अब ना चाहते हुए भी जीएसटी के कारण रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा। इसलिए इन 70 लाख रोज़गारों को नया रोज़गार नहीं माना जा सकता है।

नवंबर से दिसंबर 2017 के बीच ईपीएफओ के लगभग 4.5 लाख एक्टिव मेंबर्स की संख्‍या कम होने का डाटा अहम है। जबकि इसी एक माह में ईपीएफओ के पास अपने कर्मचारियों का पीएफ जमा कराने वाले कंपनियों की तादाद करीब 3,000 बढ़ी है।

मतलब कम्पनियाँ रजिस्ट्रेशन तो करा रही हैं लेकिन कमर्चारियों की संख्या नहीं बढ़ रही है। ये बाज़ार में घटती नौकरियों को दिखाता है।

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