दरिंदों पर मेहरबान भाजपा की राजनीति, कश्मीर में मासूम बच्ची के बलात्कारियों के साथ खड़े हुए BJP नेता

दरिंदों पर मेहरबान भाजपा की राजनीति, कश्मीर में मासूम बच्ची के बलात्कारियों के साथ खड़े हुए BJP नेता

देश में राजनीती का स्तर इतना ज़्यादा गिर चुका है कि राजनीतिक पार्टियाँ या नेता सत्ता के लिए किसी भी सामाजिक मूल्य को कुचलने और अपराध को समर्थन देने के लिए राज़ी हैं।

एक तरफ देश में बेटी पढ़ाओ और बचाओ की बात होती है और दूसरी तरफ बेटी की अस्मिता, उसकी ज़िंदगी की भी कोई कीमत नहीं है।

जम्मू-कश्मीर में इस समय एक 8 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या को लेकर राजनीति हो रही है। राज्य की सरकार में हिस्सेदार भाजपा के विधायक दीपक शर्मा और भाजपा से ही जुड़ा एक संगठन ‘हिन्दू एकता मंच’ बलात्कार और हत्या के आरोपी की रिहाई की मांग कर रहे हैं। इस संगठन के अध्यक्ष जम्मू कश्मीर के भाजपा अध्यक्ष विजय शर्मा ही हैं।

क्या है मामला

10 जनवरी को कथुआ के रस्साना में 8 साल की आसिफ बानो लापता हो गई थी। पुलिस को एक हफ्ते बाद उसकी लाश मिली। पुलिस को पता चला की बच्ची के साथ बलात्कार भी किया गया है। बच्ची के पिता मोहम्मद युसूफ बताते हैं कि उसके होठ ज़ख़्मी थे और टांगों पर भी मारपीट के निशान थे।

घटना ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया। मामला विधानसभा तक चला गया। राज्य सरकार ने भी मामले की जांच का आश्वासन दिया। दो दिन बाद ही पुलिस ने एक 15 साल के बच्चे को पकड़ा। ये बताया गया कि बच्चे ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल लिया है।

लेकिन बच्ची के घरवाले और उनके आसपास के लोग इस गिरफ़्तारी से संतुष्ट नहीं थे। उनके कहना था कि बच्ची को पकड़ कर ये सब करना और एक हफ्ते तक छुपाकर रखना किसी 15 साल के बच्चे की बस की बात नहीं है।

इसके बाद फरवरी में पुलिस ने फिर से छानबीन की। इस जांच में 10 पुलिस अधिकारीयों की एक टीम ने मामले में विशेष पुलिसकर्मी (एसपीओ) दीपक खजुरिया को पकड़ा। बता दें, कि खजुरिया उस पुलिस टीम का हिस्सा थे जो इस मामले में जांच कर रही थी और बच्चे को पकड़ा था। ये उस दल का भी हिस्सा थे जिसने घटना के बाद जनता के प्रदर्शनों को दबाया था।

मामले पर हो रही राजनीति

मामले को साम्प्रदायिक रंग देते हुए भाजपा नेताओं ने खजुरिया के समर्थन में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। बच्ची के समर्थकों को राष्ट्रविरोधी और खजुरिया को देशभक्त कहा जाने लगा। भाजपा के कथुआ ज़िले के अध्यक्ष पीएन डोगरा इन प्रदर्शनों में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

प्रदर्शनों में हाथ में झंडा लिए बलात्कार और हत्या के आरोपी खजुरिया की रिहाई की मांग की जा रही है।

इसपर प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि खजुरिया के समर्थन में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जो चीज़ डराती ई वो हैं इन प्रदर्शनों में तिरंगे का इस्तेमाल। ये राष्ट्रीय ध्वज को अपवित्र करना है। आरोपी पकड़ा गया है और कानून अपना काम करेगा।

राजनीतिक रोटियां सेकने में यहाँ कांग्रेस भी पीछे नहीं है। खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली पार्टी के नेता सुभाष चन्द्र और गिरधारी लाल भी खजुरिया के समर्थन में खड़े नज़र आ रहे हैं।

मानवाधिकार संगठन और समाजसेवी ने भाजपा पर मामले का राजनीतिकरण करने और सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता तालिब हुसैन कहते हैं कि बलात्कार जैसे मामलों का रानीतिकरण करना सही नहीं हैं। इससे समाज बर्बाद हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि लेकिन अभी भी हालत उतने ख़राब नहीं हुए हैं। बहुत से हिंदूवादी संगठन ममले में बच्ची के घरवालों का ही पक्ष ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि रविवार को ही कुछ हिंदूवादी संगठनों ने असीफा के समर्थन में जम्मू सिटी में सेमिनार आयोजित किया है।

Courtesy: boltahindustan.

Categories: Crime