लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को लगा तगड़ा झटका, भाजपा का दोस्त बना राजग का दुश्मन

नई दिल्ली: तेलगू देशम पार्टी (तेदेपा) द्वारा की जा रही आंध्र प्रदेश के विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग ने तेदेपा और केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बीच में ऐसी दीवार खींच दी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक गिराने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। वहीं, तेदेपा मुखिया चन्द्र बाबू नायडू राजग से रिश्ता ख़त्म करने की कवायद शुरू कर दी है। उन्होंने आज तेदेपा की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है, जिसमें राजग से रिश्ता ख़त्म करने के फैसले पर निर्णय लिया जाएगा

 

आपको बता दें कि तेदेपा और केंद्र सरकार के आपसी संबंधों में पड़ी दरार को ख़त्म करने के लिए बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात थी। खबर है कि दोनों लोगों के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई थी। लेकिन इस बातचीत का कोई निष्कर्ष नहीं निकल सकता था और टीडीपी के दो मंत्रियों नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू और विज्ञान एवं प्रावैधिकी राज्य मंत्री वाई एस चौधरी ने मोदी सरकार से इस्तीफा दे दिया था। आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन इस्तीफों को स्वीकार भी कर लिया है।

उधर, आंध्र प्रदेश में विपक्ष की भूमिका निभाने वाली वाईएसआर कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू के इस फैसले का समर्थन करते हुए सराहना की है। वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन्मोहन रेड्डी ने सीएम चंद्रबाबू के इस फैसले को आंध्र प्रदेश की जनता की जीत करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चन्द्र बाबू को मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चुनौती भी दी है।

जगनमोहन ने कहा है कि अगर टीडीपी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी तो उनके सांसद इसका समर्थन करेंगे। इसके साथ ही रेड्डी ने कहा है कि अगर टीडीपी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाती है तो वाईएसआर कांग्रेस 21 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव लाएगी और टीडीपी को चाहिए कि उसका समर्थन करे। बता दें कि लोकसभा में वाईएसआर कांग्रेस के कुल आठ सांसद हैं।

सूत्र बता रहे हैं कि आंध्र प्रदेश की इन दोनों पार्टियों के नेताओं ने संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन सामूहिक इस्तीफा देने का भी मन बना लिया है ताकि राज्य को विशेष दर्जा देने के लिए कंद्र सरकार पर दवाब बनाया जा सके।

बता दें कि जब आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य बन रहा था, तब विशेष राज्य का दर्जा देने का ऐलान किया गया था। इसके अलावा राज्य के बंटवारे के बाद से आंध्र प्रदेश को भारी राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा है। केंद्र की मोदी सरकार ने भी 2016 में आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज देने की घोषणा की थी। हालांकि अभी तक मोदी सरकार द्वारा किए गए ऐलान को कोई अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।

Courtesy: puridunia

Categories: India

Related Articles