सीरिया: तुर्की ने किया अमेरिका और इन 5 देशों में हो रही गुप्त बातों का पर्दाफाश

सीरिया: तुर्की ने किया अमेरिका और इन 5 देशों में हो रही गुप्त बातों का पर्दाफाश

तुर्की से प्रकाशित होने वाले एक समाचार पत्र ने अमरीका 5 देशों के मध्य होने वाली एक गुप्त बैठक की जानकारी दी है जिसमें सीरिया के विभाजन की योजना तैयार की गयी।

तुर्की से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ” स्टार ” ने लिखा है कि अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जार्डन और सऊदी अरब के प्रतिनिधियों ने वाशिंग्टन में होने वाली इस गुप्त बैठक में सीरिया को कई हिस्सों में बांटने की योजना तैयार कर ली है। रिपोर्ट के अनुसार अमरीका ने इस बैठक में मांग की कि सीरिया के उत्तर और पूर्व में कुर्दों की एक स्वाधीन सरकार बनायी जाए। तुर्की के समाचार पत्र ” स्टार” ने सीरिया के विभाजन के लिए इस बैठक में तय किये गये 6 क़दमों को इस प्रकार से स्पष्ट किया है।

सीरिया के पूर्व व उत्तर में कुर्द सरकार की स्थापना
इस सरकार को भूमध्य सरकार तक पहुंचाने में मदद करना
संयुक्त राष्ट्र संघ को इस सरकार को औपचारिक रूप से स्वीकार करने पर विवश करना ।
सीरिया में शांति के लिए ” आस्ताना” और ” सूची” में होने वाली वार्ताओं के परिणामों को अस्वीकार कर देना।
इस कुर्द सरकार को संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रतिनिधित्व देना।
तुर्की को इस योजना को स्वीकार करने और उत्तरी सीरिया में जारी आप्रेशन को रोकने पर मजबूर करना ।
अमरीका ने सीरिया के विभाजन की यह जो योजना बनायी है उसमें सीरिया का ” दैरुज़्ज़ूर” क्षेत्र भी शामिल होगा जो तेल की दौलत से मालामाल है।

लेबनान से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ” अलअखबार ” ने इस से पहले अपनी एक रिपोर्ट में अमरीका में ब्रिटेन के दूतावास के ईमेलों का ब्योरा देते हुए लिखा था कि अमरीका का मक़सद, पूर्वी सीरिया को, उत्तरपूर्वी सीरिया से अलग करना है।

लेबनानी समाचार पत्र ” अलअखबार” ने लिखा है कि सीरिया के बारे में अमरीकी नीतियों में बदलाव आया है और आतंकवादी संगठन दाइश की पराजय के बाद अमरीकी जिस असंमजस के दौर से गुज़र रहे थे वह अब खत्म हो चुका है और अमरीका ने फैसला किया है कि वह यथावत सीरिया के विभाजन की योजना पर काम करेगा और इसके लिए सीरिया के युद्ध को लंबा खीचंना ज़रूरी था इसी लिए अमरीका ने अपने घटकों को अपनी इस नयी योजना से अवगत करा दिया।

अलअखबार के एक सूत्र को वाशिंग्टन में ब्रिटिश दूतावास का एक ईमेल मिला है जिसमें सीरिया के विभाजन की अमरीकी योजना पर चर्चा की गयी है और शायद यही वजह है कि रूसी विदेशमंत्री सरगई लावरोव ने हालिया दिनों में खुल कर कहा है कि अमरीका, सीरिया को विभाजित करने की कोशिश में है।

ब्रिटिश दूतावास का यह ईमेल पांच पृष्ठों पर है जिसमें मध्य पूर्व के मामलों के विशेषज्ञ बिनयामिन नारमन ” ने ब्रिटिश विदेशमंत्रालय के लिए सीरिया को विभाजित करने की अमरीकी योजना की व्याख्या की है। यह वही अमरीकी योजना है जिसका वर्णन ” डेविड सैटरफील्ड ” ने जनवरी के महीने में होने वाली एक गुप्त बैठक के दौरान, ” सीरिया गुट ” के सामने किया था। जनवरी में होने वाली इस बैठक में ब्रिटिश विदेशमंत्रालय में सीरियाई मामलों के प्रभारी ” ह्यू केलारी” फ्रांसीसी विदेशमंत्रालय में अफ्रीका व मध्य पूर्व के मामलों के प्रभारी ” जेरोम बोनाफोन” और जार्डन व सऊदी अरब के दो वरिष्ठ अधिकारी ” नोवाफ वसफी अत्तल” और ” जमाल अलअक़ील” उपस्थित थे। इस बैठक में सैटरफील्ड ने सीरिया के विभाजन के लिए दृष्टिगत 6 क़दमों का ब्योरा दिया और इन लोगों को समझाया कि सीरिया के विभाजन के लिए उन्हें क्या करना है।

रिपोर्ट के अनुसार इस बैठक में भाग लेने वालों ने कहा कि इस योजना पर काम के लिए उन्हें एक साल का समय चाहिए जिसके दौरान वह रूस की विजय के एलान को भी चुनौती देंगे और मास्को को इस बात की अनुमति नहीं देंगे कि वह सीरिया के भविष्य का अकेले ही निर्धारण करे। इसके लिए सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत डी मिस्तूरा को आगे बढ़ा कर जेनेवा वार्ता को फिर से शुरु किये जाने का कार्यक्रम है।

सैटरफील्ड ने बताया कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सीरिया में दाइश की पराजय के बावजूद, अहम सैनिक बलों को इस देश में बनाए रखना चाहते हैं और अमरीकी सरकार ने इस अभियान के लिए वार्षिक रूप से 4 अरब डालर का बजट विशेष किया है। इस का एक मकसद सीरिया में पैर जमाने या सीरिया के राजनीतिक भविष् में भागीदारी से ईरान को भी रोकना है।

 

लेबनानी समाचार पत्र के अनुसार सीरिया के विभाजन की अमरीकी योजना में संयुक्त राष्ट्र संघ को अधिक भूमिका दी गयी है। अमरीकियों ने अपने घटकों को बताया है कि वह सीरिया में इस प्रकार के हालात और संस्था बनाना चाहता है जिसके अंतर्गत बश्शार असद के लिए चुनाव में भाग लेना संभव न हो।

याद रहे अमरीका ने इराक़ के विभाजन की भी योजना बनायी थी, खुल कर एलान किया था और उस पर काम भी किया था लेकिन इराकी जनता और अधिकारियों की सूझबूझ से फिलहाल वह योजना तो नाकाम हो गयी है।

अमरीका इस्राईल के लिए खतरा बनने वाले देशों को कई टुकड़ों में बांट कर उन्हें बेहद कमज़ोर कर देना चाहता है ताकि इस्राईल पूरी तरह से सुरक्षित रहे मगर फिलहाल उसकी सारी योजनाएं विफल हो रही हैं और इलाक़े में इस्राईल के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है जिसे खुद इस्राईल और अमरीकी अधिकारी स्वीकार करते हैं।

Courtesy: openkhabar.

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