महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में सड़कों पर उतरे हजारों किसान, योगी सरकार को बताया ‘किसान विरोधी’

महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में सड़कों पर उतरे हजारों किसान, योगी सरकार को बताया ‘किसान विरोधी’

सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों से वादा कर के भूल जाती है लेकिन वो नहीं भूलते जिन्हें उन वादों से उम्मीद होती है। केंद्र हो राज्य सरकार दोनों का रवैया किसानों को लेकर लगभग एक ही है। इसलिए अन्नदाताओं ने भी अब ठान लिया है कि वो सरकार को सबक सीखा कर रहेंगे।

महाराष्ट्र में 35,000 किसानों ने 200 किलोमीटर लंबी पदयात्रा कर फडणवीस सरकार की नींद से जगा दिया। देवेंद्र फडणवीस को किसानों की लगभग सभी मांगों को मानना पड़ा।

महाराष्ट्र की तर्ज पर ही उत्तर प्रदेश में भी अखिल भारतीय किसान महासभा ने हजारों किसानों इक्ट्ठा कर योगी सरकार से वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं।

 

पहले तो योगी सरकार ने अपनी दमनकारी नीतियों को इस्तेमाल करते हुए किसानों के रैली की अनुमति रद्द कर दी है। इस बात की जानकारी वामपंथी नेता सुभासनी ने एक ट्वीट के माध्यम से दी।

उन्होंने लिखा कि ‘खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे!! योगी अपना ग़ुस्सा लाल झंडेवालो पर उतारना चाह रहे हैं। कल की किसान सभा की लखनऊ रैली की अनुमति रद्द कर दी है लेकिन रैली तो होगी।’

 

और ऐसा ही हुआ प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड पर प्रदेश भर से आये किसानों ने हक की आवाज बुलंद की। हजारों की संख्या में जुटे किसानों ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुटता जाहिर की और आने वाले दिनों में सरकार को घेरने की चेतावनी दी। उत्तर प्रदेश किसान सभा के बैनर तले आयोजित इस रैली को किसान प्रतिरोध रैली का नाम दिया गया।

योगी और मोदी सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए किसान नेताओं ने कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों के साथ किये गये वादे को पूरा न कर धोखा किया है।

कृषि क्षेत्र गहरे संकट में है और खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। कर्ज के मकडजाल में फंसे किसान बडे पैमाने पर आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं।

पत्रिका में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, किसानों की मांग है कि प्रदेश के सभी किसानों को फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम दिया जाये और किसानों को कर्जमुक्ति के वादे को प्रधानमंत्री पूरा करें।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से किसानों ने मांग की कि बिजली की दरों में बढोत्तरी और सात जिलों में निजीकरण, खेती में ठेकाकरण और कार्पोरेटीकरण रोका जाये।

इसके साथ ही पशु व्यापार पर रोक लगाने, आवारा पशुओं से फसल की सुरक्षा, साठ साल से अधिक उम्र के किसानों को पांच हजार रुपये हर महीने पेंशन, सभी को सस्ता राशन दिया जाये।

Courtesy: boltaup.

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