‘मोदी सरकार ने चौपट कर दी अर्थव्यवस्था’

‘मोदी सरकार ने चौपट कर दी अर्थव्यवस्था’

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि देश को अक्षम आर्थिक प्रबंधकों के हाथों से बचाने की जरूरत है। पार्टी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) डराने धमकाने वाली आर्थिक व्यवस्था में विश्वास करती है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पार्टी के 84वें अधिवेशन में देश के आर्थिक हालात पर प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है और एक साल बाद जो भी सरकार सत्ता में आएगी उसे बहुत बड़े संकट का सामना करना पड़ेगा। 

चिदंबरम ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने 4 साल के कार्यकाल में लोगों को गरीबी के चंगुल से निकालने के बजाय ज्यादा लोगों को गरीबी में धकेल दिया है। फंसे ऋण के बढ़ते बोझ के कारण बैंक खस्ताहाल हैं और नोटबंदी तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने नौकरियां खत्म कर दी हैं। उन्होंने कहा, ‘केवल कांग्रेस ही देश को इस परिस्थिति से बाहर निकाल सकती है। मैं अहंकार या घमंड के कारण यह बात नहीं बोल रहा हूं। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हमने पहले भी ऐसा किया है और आगे भी करेंगे।’

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘जो लोग बैंकिंग व्यवस्था से चिंतित हैं, मैं उन्हें भरोसा देता चाहता हूं। हमने 2008-09 में वैश्विक मंदी के दौर में भारत की एनपीए की समस्या का समाधान किया था।’ चिंदबरम पर हाल के दिनों में दबाव बढ़ा है क्योंकि उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले की जांच चल रही है और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। कांग्रेस के आर्थिक प्रस्ताव में कहा गया है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण देश में वास्तविक कृषि जीडीपी और वास्तविक कृषि राजस्व पिछले 4 साल में ठहर गया है।

बैंकों ने जितना ऋण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के 10 साल के कार्यकाल में बट्टे खाते में डाला था उन्हें पिछले 3 साल में उससे 4 गुना ज्यादा ऋण बट्टे खाते में डालने के लिए मजबूर किया गया। कांग्रेस निजी क्षेत्र और मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के जरिये समावेशी विकास और सशक्त कल्याणकारी राज्य के जरिये मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दोहरे लक्ष्य में विश्वास करती है। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा की आर्थिक सोच डराने धमकाने वाली है जिससे कुछ ही लोगों का फायदा होता है, मध्य वर्ग पर मार पड़ती है और गरीबों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। भाजपा देश के आकार, व्यापकता और विविधता की तरफ आंखें मूंदकर बैठी है और उसकी सोच कृत्रिम एकता के सिद्धांत पर टिकी है।

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