पहले राष्ट्रपति से उनके शहर में शिलान्यास कराया, फिर प्रोजेक्ट पर लगा दिया अड़ंगा

पहले राष्ट्रपति से उनके शहर में शिलान्यास कराया, फिर प्रोजेक्ट पर लगा दिया अड़ंगा

पहले राष्ट्रपति से जल्दबाजी में शिलान्यास कराया, फिर मॉडल बदलने की बात कहकर प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी। यह हाल है कानपुर के अफसरों का। मामला गंगा किनारे सॉलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सेंटर (एसएलआरएम) के निर्माण से जुड़ा है। यह प्रोजेक्ट बनारस की तर्ज पर कानपुर में शुरू हुआ था। जब पंचायती राज विभाग ने गंगा किनारे वाले खुले में शौच मुक्त(ओडीएफ) गांवों में एसएलआरएम सेंटर बनाने की योजना बनाई थी। पिछले साल 15 सितंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शहर आगमन पर स्वच्छता ही सेवा नामक देशव्यापी मिशन की शुरुआत की थी।

सबसे पहले कानपुर के कल्याणपुर ब्लॉक में ईश्वरीगंज गांव ओडीएफ घोषित हुआ था। जिस पर यहां सेंटर बनाए जाने की कवायद शुरू हुई थी। शुरुआत मे तो इस सेंटर के निर्माण के प्रति गंभीरता नजर आ रही थी, जब जमीन का मामला फंसने पर ग्राम प्रधान आकाश वर्मा ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा दान मे दे दिया। मगर, अब लापरवाही से निर्माण अधर में लटकता दिख रहा है।

शिलान्यास कराने में जल्दबाजी क्योंः 15 सितंबर को राष्ट्रपति ने प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी कर दिया।इसके बाद विभाग ने काम शुरू करा दिया। करीब 11 लाख रुपये खर्च कर 75 फीसद निर्माण पूरा करने के बाद अफसरों को लगा कि इसका मॉडल ठीक नहीं है। अब विभागीय अधिकारियों ने पंचायत से कह दिया है कि प्रोजेक्ट के लिए पैसा नहीं मिलेगा,क्योंकि इसका मॉडल बदला जाएगा।ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि अब तक जो पैसा खर्च हो चुका है,उसकी भरपाई कौन करेगा।

यदि मॉडल बदलना ही था तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उसका शिलान्यास क्यों कराया गया।इस बारे में जब जिला पंचायत अधिकारी निरीश चन्द्र साहू से बात करी गयी तो उन्होंने बताया कि कुछ अड़चने आईं है और उसके निराकरण की कोशिश की जा रही है,विभाग के अधिकारियों को प्रोजेक्ट पर रूके हुए काम की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है जैसे ही आगे निर्देश मिलेगा उसी के अनुरूप काम होगा।

प्लांट से यह होता फायदाः सॉलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सेंटर शहर का ऐसा पहला प्रोजेक्ट था, जिससे सिर्फ महिलाओं को ही रोजगार दिया जाना था।इसके जरिये गावों का कूड़ा प्रबंधन होना है।डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन होगा। रीसाइकलिंग करने योग्य कूड़ा को संबंधित इकाइयों को बेच दिया जाएगा,जबकि शेष कूड़े का सेग्रीगेशन(अलगाव) कर उसकी प्रोसेसिंग कर खाद आदि बनाया जाएगा। वहां गोबर गैस प्लांट भी लगाया जा सकता है।यहां जो उत्पाद बनेंगे, उनकी बिक्री की जाएगी। जिससे स्थानीय महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल सकता था।

 

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