इलाहाबाद : दलित आंदोलन के दौरान हिंसा करने वाले 1000 से ज्यादा उपद्रवियों पर के दर्ज

इलाहाबाद : दलित आंदोलन के दौरान हिंसा करने वाले 1000 से ज्यादा उपद्रवियों पर के दर्ज

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अनुसूचित जति और अनुसूचित जनजाति के अधिनियमों में बदलाव के बाद भारत भर उग्र आंदोलन हो रहे हैं। यूपी में कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं हुई हैं। इलाहाबाद में एक हजार से ज्यादा अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

 

सोमवार को भारत बंद के दौरान इलाहाबाद में कई जगहों पर तोड़फोड़ और हंगामे हुए। इस मामले में पुलिस ने सिविल लाइंस और कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा रलवे लाइन को जाम करने वालों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है।

वहीँ पुलिस ने इलाहाबाद के सिविल लाइंस के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स इंदिरा भवन में जबरन दुकान बंद करवाने, कार और बाइकों में तोड़फोड़ करने के मामले में  मिली तहरीर के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला दर्ज करने के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

इसी तरह से कर्नलगंज थाने में भी अज्ञात भीड़ और 17 नामजद के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस उनकी तलाश करने में जुटी है। भारत बंद के नाम पर बवाल करने वालों के खिलाफ अब तक 6 मुकदमें दर्ज किए गए हैं। जिसमें हजार से ज्यादा अज्ञात और दर्जनों नामजद लोग शामिल हैं। इनमें से कई छात्रनेता भी हैं।

क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं। सरकारी कर्मी के लिए – तुरंत गिरफ्तारी नहीं। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी। आम लोगों के लिए – एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी। संगठनों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। जो नियम पहले थे, वे यथावत लागू हों।

Courtesy: puridunia.

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