मक्‍का मस्जिद धमाके: NIA के वकील का ABVP से रहा है जुड़ाव, 2015 में सौंपा गया था केस

मक्‍का मस्जिद धमाके: NIA के वकील का ABVP से रहा है जुड़ाव, 2015 में सौंपा गया था केस

हैदराबाद की मक्का मस्जिद विस्फोट केस में 16 अप्रैल को एनआईए कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत सभी पांच आरोपियों को बरी किया था। धमाकों में नौ लोग मरे थे, जबकि 50 से अधिक जख्मी हुए थे। मामले को लेकर 2015 में ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें एनआईए की ओर से वकील एन. हरिनाथ को बनाया गया था।

मक्का मस्जिद धमाके के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के वकील एन.हरिनाथ का जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से था। वह हैदराबाद में छात्र के रूप में इस संगठन से जुड़े हुए थे। वकील ने मंगलवार (17 अप्रैल) को स्वीकार किया कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध इस छात्र संगठन की तब कुछ कार्यक्रमों के आयोजन कराने में मदद की थी।

आपको बता दें कि 2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद धमाके के मामले में सोमवार (16 अप्रैल) को नामपल्ली स्थित एनआईए के स्पेशल कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया था। धमाकों में नौ लोगों की जान चली गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे।

मक्का मस्जिद धमाके मामले में साल 2015 में ट्रायल शुरू हुआ था, जिसके बाद हरिनाथ को एनआईए की ओर से वकील बनाया गया था। उन्होंने बताया, “यह उन दिनों की बात है, जब मैं वकालत की पढ़ाई कर रहा था। मैं सेकंड ईयर में था, तभी मैं एबीवीपी में शामिल हो गया था। लेकिन मेरा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कोई लेना-देना नहीं रहा है। मैं उसी दौर से एबीवीबी के कार्यक्रमों की मदद के लिए चंदा दे रहा हूं और उनकी मदद कर रहा हूं।”

हरिनाथ को इस मामले में एनआईए का वकील बनाने के सवाल पर एजेंसी ने जवाब देने से इनकार कर दिया। वकील ने यह भी बताया कि मामले को हलका करने को लेकर अभी तक उन्हें किसी प्रकार के दवाब का सामना नहीं करना पड़ा।

बकौल हरिनाथ, “पहले दिन से हम मामले में दोष सिद्ध करने को लेकर काम कर रहे हैं। 2015 में जब मैं आया था, तब ट्रायल शुरू होने वाला था। मेरे आवेदन पर हुई स्क्रूटनी की प्रक्रिया के बाद मैं एनआईए से जुड़ गया था। मैंने तब अपने पिछले केसों की सूची मुहैया कराई थी। मैं साल 1994 से क्रिमिनल कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहा हूं और 2011 से प्रवर्तन निदेशालय में खास वकील हूं।”

एनआईए के वकील के मुताबिक, “पूरा मामला असीमानंद के बयान पर आधारित था, जो दिल्ली में एक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए थे। मजिस्ट्रेट का कहना था कि असीमानंद उनके पास लाए जाने से पहले सीबीआई की हिरासत में था। बयान दर्ज कराने के बाद दोबारा उसे वहीं भेज दिया गया था। ऐसे में, कोर्ट ने असीमानंद के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को सही नहीं बताया था।”

Courtesy: jansatta.

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