फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम: मोदी राज में सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंची पेट्रोल की कीमत, दिल्‍ली में कीमत 74.40 रुपये तक पहुंच गई है, डीजल ने भी तोड़ा रिकॉर्ड

फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम: मोदी राज में सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंची पेट्रोल की कीमत, दिल्‍ली में कीमत 74.40 रुपये तक पहुंच गई है, डीजल ने भी तोड़ा रिकॉर्ड

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में तेजी के चलते भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लग गई है। देश की राजधानी दिल्ली में रविवार (22 अप्रैल) को पेट्रोल के दाम पिछले 55 महीनों में सबसे उच्चतम स्तर पर चला गया है, वहीं डीजल के दाम अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। जी हां, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दर्ज हो रही वृद्धि ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों लेकर देशभर में हाहाकार मचा हुआ है।

NDTV के मुताबिक पेट्रोल की कीमतें रविवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकाल में सर्वोच्च स्तर 74.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दरें सर्वकालिक उच्च स्तर 65.65 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गयीं। इससे उपभोक्ताओं के ऊपर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती की मांग तेज हो गयी है। सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियां पिछले साल जून से रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमतें संशोधित कर रही हैं।

रविवार को जारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतें 19-19 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गयी हैं। अधिसूचना में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ने से घरेलू बाजार में भी वृद्धि करनी पड़ी है। इससे पहले कल भी पेट्रोल की कीमतें 13 पैसे प्रति लीटर तथा डीजल की कीमतें 15 पैसे प्रति लीटर बढ़ायी गयी थीं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 74.40 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गयी है जो 14 सितंबर 2013 के बाद का उच्च स्तर पर है।

तब पेट्रोल 76.06 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया था। दक्षिण एशियाई देशों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सर्वाधिक हैं। देश में विपणन दरों में लगभग आधी हिस्सेदारी करों की है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच उत्पाद शुल्क में नौ बार बढ़ोत्तरी की। उत्पाद शुल्क में महज एक बार पिछले साल अक्तूबर में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई।

 

गौरतलब है कि इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का खामियाजा राज्यों में मौजूदा बीजेपी सरकार को उठाना पड़ सकता है। जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें कर्नाटक को छोड़कर हर जगह पर बीजेपी की ही सरकार है।

पेट्रोलियम क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। ईरान पर प्रतिबंध और सीरिया में संघर्ष से क्रूड की सप्लाई कम हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम और बढ़ने की आशंका है। गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां पिछले साल जून से दैनिक आधार पर ईंधन कीमतों में संशोधन कर रही हैं।

Courtesy: .jantakareporter.

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