विडियो: BJP के मंत्री को महिलाओं ने दौड़ा दौड़ा कर गाँव से भगाया

विडियो: BJP के मंत्री को महिलाओं ने दौड़ा दौड़ा कर गाँव से भगाया

देश की जनता ने अब जयजयकार करना बंद कर दिया है। वो सवाल करती है और उसे जवाब चाहिए। उत्तराखंड से कुछ इसी तरह का संदेश आ रहा है।

देहरादून के थलीसैंण में राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत को सड़क के लिए पेड़ काटने पर महिलाओं ने दौड़ा लिया। यही नहीं, महिलाओं ने धन सिंह रावत के साथ धक्का-मुक्की भी की। इसके साथ ही ग्रामीणों ने ठेकेदार पर भी नाराजगी जाहिर की, जो कि राज्य मंत्री को अपने साथ लेकर गांव पहुंचे थे ताकि वह गांव वालों को पेड़ों की कटाई के लिए मना सकें।

गौरतलब है कि धन सिंह रावत को यह दिन इसलिए देखना पड़ा क्योंकि उन्होंने जल संरक्षित कर शुद्ध पान देने वाले बांज (ओक) के पेड़ों को ही कटाने का फैसला अपनी विधायक निधि से धन मुहैया देकर कराया था। गांव की महिलाओं ने कहा कि यदि पान नहीं रहेगा तो गांव का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में राज्यमंत्री धन सिंह रावत ने बांज के जंगलों के बीच से संपर्क मोटर मार्ग स्वीकृत किया था। मंत्री ने जैसे ही इस मार्ग का शिलान्यास किया, ग्रामीणों ने फैसले को लेकर नाराजगी जाहिर की। महिलाओं ने मंत्री धन सिंह को अपने गांव खंडखिल में नहीं आने दिया। महिलाओं ने कहा कि उन्हें बांज के पेड़ों की कटाई के बाद सड़क की सुविधा नहीं चाहिए। उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत के साथ महिलाओं द्वारा धक्का-मुक्की करने और उनके खिलाफ नारेबाजी का यह विडियो सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से वायरल हो रहा है।

बता दें कि डॉक्टर धन सिंह श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। हाल ही उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत चोपड़ा (ब्लॉक थलीसैंण) में चोपड़ा से खंडखिल तक 300 मीटर तक सड़क विधायक निधि से स्वीकृत की है। तकरीबन पांच लाख रुपये की लागत की इस योजना का बीते रविवार की शाम को शिलान्यास होना था, जिसके लिए मंत्री धन सिंह रावत दलबल के साथ पहुंचे। चोपड़ा के ग्राम प्रधान बालम सिंह की मौजूदगी में उन्होंने मोटर मार्ग का शिलान्यास किया। इसके बाद वे चोपड़ा से पैदल खंडखिल के लिए रवाना हुए, जिसके बाद रास्ते में उन्हें महिलाओं ने घेर लिया।

ग्रामीणों की नाराज़गी इतनी ज्यादा थी कि धन सिंह रावत के जाने के बाद भी वो काफी देर तक प्रदर्शन करते रहे और मंत्री और सरकार विरोधी नारे भी लगाए।

बता दें कि उत्तराखंड में ये पहला ऐसा मामला है जब किसी मंत्री के साथ जनता ऐसे पेश आई हो। ग्रामीणों की नाराज़गी ये बताने के लिये काफी है कि अब वो नेताओं के झूठे वादों से आज़िज आ चुकी है और उन्हें उद्घाटन और शिलान्यास के इतर असल में विकास चाहिये।

 

Courtesy: exposekhabar.

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