क्यों सिर्फ गीता को ‘बेटी’ माना भाजपा नेताओं ने? क्या ‘कठुआ’ और ‘उन्नाव की बेटियाँ किसी की बेटी नहीं?

क्यों सिर्फ गीता को ‘बेटी’ माना भाजपा नेताओं ने? क्या ‘कठुआ’ और ‘उन्नाव की बेटियाँ किसी की बेटी नहीं?

25 अप्रैल, 2018 बुधवार शाम दिल्ली के राजपथ पर बीजेपी नेताओं ने सैकड़ों लोगों के साथ बलात्कार और बलात्कारी के विरोध में कैंडल मार्च निकाला। ये कैंडल मार्च गाजीपुर की रहने वाली गीता (काल्पनीक नाम) के लिए था। दरअसल 11 वर्षीय गीता के साथ साहिबाबाद के मदरसे में रेप हुआ है। रेप आरोपी एक नाबालिग ‘मुस्लिम’ लड़का है।

मुस्लिम लिखना जरूर नहीं था लेकिन बीजेपी के कैंडल मार्च को समझाने के लिए ये बहुत जरूरी हो जाता है। याद कीजिए कैंडल मार्च आसिफा को इंसाफ दिलाने के लिए निकाला गया था लेकिन वो बीजेपी के कैंडल मार्च से बिल्कुल अलग था।

बेटी गीता के लिए जस्टिस मार्च निकाला गया लेकिन जब बात कठुआ की बेटी आसिफा और उन्नाव की बेटी की आई तो मुंह छुपा लिया।

गीता केस में आरोपी एक खास समुदाय का है इसलिए राजनीति करने उतरे भाजपा नेताओं से खुद जनता सवाल पूछ रही है।

पूरी घटना

दरअसल मासला ये है कि बीजेपी को इस बार एक रेप की घटना में हिंदू-मुस्लिम वाला उसका फेवरेट टॉपिक मिल गया है। अब बीजेपी इस रेप की घटना को वोट में कंवर्ट करना चाहती है। इसी प्रयास में 25 अप्रैल, 2018 बुधवार शाम दिल्ली के राजपथ पर बीजेपी नेताओं ने सैकड़ों लोगों के साथ बलात्कार और बलात्कारी के विरोध में कैंडल मार्च निकाला। इस कैंडल मार्च में खुद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी, बीजेपी सांसद महेश गीरी, कुलजीत सिंह चहल और पूर्वी दिल्ली नगर निगम के उपमहापौर बिपिन बिहारी सिंह शामिल हुए।

ये कैंडल मार्च गाजीपुर की रहने वाली गीता (काल्पनीक नाम) के लिए था। दरअसल 11 वर्षीय गीता के साथ साहिबाबाद के मदरसे में रेप हुआ है। रेप आरोपी एक नाबालिग ‘मुस्लिम’ लड़का है।

लेकिन हकीकत ये है कि ये कैंडल मार्च एक छलावा है। कैंडल मार्च, आंदोलन, प्रदर्शन, कमजोर और मजबूर लोग करते हैं। क्या बीजेपी कमजोर है, मजबूर है?

पीड़िता दिल्ली की रहने वाली है। दिल्ली पुलिस केंद्र की मोदी सरकार के हाथ में है। आरोपी उत्तर प्रदेश का है, यूपी में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट योगी आदित्यनाथ की पुलिस है। सीबीआई सरकार के पास है, तमाम जांच दल, विशेष लोगों की टीम सरकार के पास है, फांसी वाला कानून सरकार ने पास कर ही लिया है। तो देर की बात की है, गीता के दोषी को तुंरत सजा दीजिए!

कैंडल मार्च करने की क्या जरूर है? हकीकत तो ये है कि बीजेपी एक मासूम के साथ हुए रेप को सामप्रदायिक रंग देकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहिती है। बीजेपी धर्म की राजनीति करती है ये बात किसी से छिपी नहीं है।

वरना उन्नाव में तो खुद बीजेपी नेता कुलदीप सिंह सेंगर ही एक नाबालिग के रेप का आरोपी है, बीजेपी ने उन्नाव की उस बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए कितने कैंडल मार्च किए? उल्टा विधायक को बचाने की हर कोशिश अब भी जारी है। यहां तक की कुलदीप के समर्थन में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

Courtesy: Boltaup

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