दलित के घर जाकर योगी के मंत्री ने खाया होटल का खाना, अभिसार बोले- इनकी फितरत नहीं बदल सकती

दलित के घर जाकर योगी के मंत्री ने खाया होटल का खाना, अभिसार बोले- इनकी फितरत नहीं बदल सकती

वोट एक रूप अनेक’ कही वोट गांधी को माला पहनाने से मिलती है, कही अंबेडकर का गुणगान करने से। कभी वोट परशुराम के फरसा में फंसा होता है, तो कभी दलित के चूल्हे में। किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए दिल्ली की राजगद्दी सुरक्षित करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश अपनी विविधता का पंख पसारे हुए है।

राजनीतिक पार्टियों को समझ ही नहीं आ रहा कि वो परशुराम के वंशजों को खुश करें या मर्यादा पुरुषोत्तम के वंशजों को, यदुवंशियों को खुश करें या मौर्यवंशियों को… या उन दलितों को खुश करें जिसकी संख्या सबसे ज्यादा है। तो तय ये हुआ कि जिसकी संख्या ज्यादा है उसी को फांसना है।

दलितों के घर खाना खाने वाला ड्रामा अब पुराना हो चुका है, कई बार इसकी पोल पट्टी भी खुल चुकी है। लेकिन अब भी ये इस्तेमाल में है। पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ एक दलित परिवार के यहां खाना खाने गए थें, सीएम योगी के स्वागत में मवेशियों को भी दो दिन पहले से शैम्पू से नहलाया जा रहा था।

मंगलवार को योगी के मंत्री सुरेश राणा ने भी दलित के घर खाना खाकर अपने वोट में वृद्धि के सपने देखे। लेकिन अफसोस उनका ये सपना टूट गया। दरअसल, मंत्री सुरेश राणा अलीगढ़ में दलित के घर भोजन करने गये थे, मगर वहां दलित के घर का खाना खाने के बजाय बाहर से मंगाया खाना खाया।

मामल ये था कि राणा जी को दलित हितैषी भी बनने का ड्रामा करना था और दलितों के घर का खाना भी नहीं खाना था। अपने इसी प्लान के तहत मंगलवार की रात सुरेश राणा अलीगढ़ के लोहागढ़ में रजनीश कुमार नाम के शख्स के यहां पहुंच गए।

राणा जी ने अपने आने की जानकारी घर वालों को पहले से नहीं दी थी, ताकि खाने का इंतजाम परिवार कर सके। मंत्री जी ने होटल से ही खाना मंगवाया और वहां पर इसका इंतजाम कराया। बेचारे घर के मालिक रजनीश तो आश्चर्यचकित थें कि ये हो क्या रहा है। उनका कहना है कि कभी नहीं सोचा था कि मंत्री जी मेरे घर रात के 11 बजे खाना खाने आ जाएगें, अगर पहले से पता होता तो इंतजाम कर के रखता।

अब बेचारे रजनीश को कौन बताएं कि मंत्री जो उनके घर के खाने में कोई इंट्रेस्ट नहीं, वो बस उपर से आए आदेश का पालन कर रहे हैं ताकि मूर्ख बनाकर वोट लूटा जा सके।

खाने में क्या-क्या था?

खाने में था पालक पनीर, मखनी दाल, छोला, रायता, तंदूर, कॉफी रसगुल्ला और पीने के लिए मिनरल वाटर। इतना ही नहीं मंत्री जी के विश्राम के लिए डबल बेड का गद्दा और चारों ओर से तूफानी हवा फेंकने वाले पानी के कूलर लगे हुए थे। यह सारी व्यवस्थाएं की एक सामुदायिक भवन में की गई थी, जिसे किसी होटल की तरह सजा दिया गया था।

सुरेश राणा के इस हरकत पर पत्रकार अभिसार शर्मा ने ट्वीट किया है कि ‘दलितों के घर खाना तो खा लो, पार्टी भी कर लो, मगर फितरत कैसे बदलोगे? मुद्दा तो वही है’

वैसे बता दें कि ये पहला मामला नहीं है जब बीजेपी नेताओं ने किसी दलित घर होटल का खाना खाया हो।

Courtesy: Boltaup

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