उत्तर प्रदेश में 21 चीनी मिलों की बिक्री में हुई धांधली की सीबीआई जांच

उत्तर प्रदेश में 21 चीनी मिलों की बिक्री में हुई धांधली की सीबीआई जांच

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, मायावती के राज में राज्य में चीनी मिल निगम की 21 सरकारी चीनी मिलों को निजी हाथों में बेचने और इसमें हुए कथित घोटाले की सीबीआई जांच होगी।

उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार ने साल 2010 से लेकर 2011 तक बड़ी संख्या में सरकारी चीनी मिलों की माली हालत को खराब बताते हुए बेच दिया था। सरकार के इस निर्णय की बहुत आलोचना हुई थी। आरोप लगाया गया था कि सरकार ने मुनाफा कमा रही चीनी मिलों को भी औने-पौने दामों में बेच दिया। इससे सरकारी खजाने को जहां बड़ा चूना लगा था, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों की बिक्री में केन्द्र सरकार के विनिवेश काननू का उल्लंघन भी किया था। चीनी मिलों को खरीदने वाली निजी कंपनियों ने मिल लेते समय वादा किया था कि चीनी मिलों को अच्छे से चलाएंगी, लेकिन वह अपने वादों से मुकर गई। इसका खामियाजा चीनी मिलों में काम करने वाले कर्मचारी और गन्ना किसान आज भी भुगत रहे हैं।

सपा सरकार ने जांच को डाला ठंडे बस्ते में

साल 2012 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद अखिलेश यादव ने अपनी कैबिनेट मीटिंग में बसपा सरकार के कार्यकाल में बेची गईं सरकारी चीनी मिलों की जांच की बात तो की थी, लेकिन उन्होंने पूरे पांच साल तक कुछ नहीं किया।

दस से ज्यादा मिलें थीं चालू हालत में

उत्तर प्रदेश चीनी निगम लिमिटेड की चालू चीनी मिलों अमरोहा, बिजनौर, बुलंदशहर, चांदपुर, जरवलरोड, खड्डा, रोहानाकलाँ, सखौती टाण्डा, सहारनपुर तथा सिसवाबाजार मिलों के अलावा बन्द पड़ी-बैतालपुर, भटनी, देवरिया, शाहगंज, बरेली, लक्ष्मीगंज, रामकोला, छितौनी, हरदोई, बाराबंकी तथा घुघली चीनी मिलों की बिक्री में हुई कथित अनियमितता तथा भ्रष्टाचार की जांच अब सीबीआई करेगी। सूत्रों के अनुसार इसमें करीब 1,100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था।

Courtesy: .outlook

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