कर्नाटक में गरमाया स्टिंग वीडियो का मामला, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग

कर्नाटक में गरमाया स्टिंग वीडियो का मामला, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग

कर्नाटक विधानसभा सभा चुनाव के मतदान में अब सिर्फ एक दिन रह गया है। इस बीच भाजपा नेता बी. श्रीरामुलु के स्टिंग वीडियो का मामला खासा गरमा गया है। शुक्रवार को इस मसले पर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा तथा वीडियो में दिख रहे भाजपा नेता और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की।

गुरुवार को कर्नाटक में कांग्रेस ने भाजपा नेता बी. श्रीरामुलु के खिलाफ 2010 में किया गया एक स्टिंग जारी किया, जिसमें वे माइनिंग के एक केस में मनमाफिक फैसले के लिए कथित रूप से सुप्रीम कोर्ट के जज को 160 करोड़ रुपये का ऑफर दे रहे हैं। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए वीडियो को फर्जी करार दिया है। मोलाकालमुरु और बादामी विधानसभा सीट से श्रीरामुलु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।

वीडियो के मामले पर शुक्रवार को चुनाव आयोग पहुंचे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में मोतीलाल वोरा, कपिल सिब्बल, मुकुल वासनिक, रणदीप सिंह सुरेजवाला, आरपीएन सिंह, पीएल पूनिया शामिल थे।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि श्रीरामुलु और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। राज्य चुनाव आयोग के सीईओ ने इस वीडियो के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, क्या यही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है? उन्होंने कहा कि श्रीरामुलु जहां से उम्मीदवार हैं, वहां चुनाव नहीं होना चाहिए। उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि चुनाव आयोग से चार मांगों को लेकर मिले थे। जिसमें उनसे कहा है कि बी श्रीरामुलु दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं उनके वहां से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए। कर्नाटक चुनाव आयोग ने इस वीडियो के प्रसारण पर रोक लगा दी जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है और संवैधानिक अधिकारों का हनन है। इस रोक को हटाया जाए। स्टिंग के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून और आईपीसी के तहत भाजपा नेता और अन्य पर मुकदमा दर्ज हो। कुछ चैनल सुनोयित षड़यंत्र के तहत भाजपा का प्रचार प्रसार कर रहे हैं उन पर कार्रवाई की जाए।

गौरतलब है कि 2009 में आंध्र प्रदेश सरकार ने ओबलापुरम माइनिंग कंपनी को कर्नाटक सीमा के पास अनंतपुर में खदानों के संचालन से प्रतिबंधित कर दिया था। तीन महीने बाद फरवरी 2010 में हाईकोर्ट ने इस आदेश को कैंसिल कर दिया  जिसके बाद राज्य सरकार फैसले के खिलाफ सु्प्रीम कोर्ट कोर्ट चली गई।

Courtesy: outlookhindi.

Categories: Uncategorized

Related Articles