2014 में भाजपाईयों ने जीतकर शपथ ली थी, 2018 में विधायक खरीदकर शपथ ले रहे हैं 2025 में शपथ ही नहीं लेगें : कन्हैया कुमार

2014 में भाजपाईयों ने जीतकर शपथ ली थी, 2018 में विधायक खरीदकर शपथ ले रहे हैं 2025 में शपथ ही नहीं लेगें : कन्हैया कुमार

बीजेपी में एक नया ट्रेंड शुरू हो चुका है। जहां बीजेपी चुनाव जीत जाती है वहां जीत का श्रेय मोदी लहर दिया जाता है और जहां बीजेपी चुनाव हार जाती हैं वहां फिर शाह का कहर शुरू होता है। मतलब किसी भी कीमत पर जीत चाहिए ही चाहिए, चाहे बहुमत मिली हो या न मिली हो, चाहे जनता ने नकार ही क्यों न दिया हो।

यही कर्नाटक में भी हुआ। कर्नाटक में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला लेकिन कांग्रेस जेडीएस मिलकर बहुमत के आंकड़े को पार कर पा रहे थे। लेकिन बीजेपी ने ऐसा होने नहीं दिया। बीजेपी के पास बहुमत नहीं है फिर भी राज्यपाल ने बी एस येदियुरप्पा को शपथ दिला दी।

जाहिर है अब बीजेपी अब अमित शाह के नेतृत्व में विधायकों की खरीदारी करेगी! क्योंकि राज्यपाल ने 15 दिन के अंदर बहुमत साबित करने को कहा है। 222 में से बीजेपी के सिर्फ 104 विधायक जीते हैं जबकि बहुमत के लिए 112 चाहिए। बीजेपी अब आठ विधायक कहां से लाएगी?

कर्नाटक चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही तमाम बुद्धिजीवी, पत्रकार, लेखक, संविधान विशेषज्ञ ये कह-कहकर थक चुके हैं कि लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। राज्यपाल नेताओं की खरीद फरोख़्त को बढ़ाव दे रहे हैं लेकिन इन बातों से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा, सुप्रीम कोर्ट तक को कोई फर्क नहीं पड़ा।

2014 लोकसभा चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी की पार्टी अब विधायकों को खरीदकर शपथ लेने लगी है। अब बीजेपी को सरकार बनाने के लिए चुनाव जीतने की भी जरूरत पड़ती। अब तो बस ‘विधायक खरीदो-सरकार बनाओ’ नीति चल रही है।

हो सकता है कुछ सालों बाद मोदी सरकार चुनाव करवाना ही बंद कर दे और हर जगह पंचायत से लेकर राष्ट्रपति तक अपने पार्टी के लोगों को बैठा दे। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने भी ऐसी ही शंका जाहिर की है।

उन्होंने लिखा है ”2014 में जीतकर शपथ ली थी, 2018 में खरीदकर शपथ ले रहे हैं, हर कोशिश करेगें कि 2025 में शपथ ही न लेनी पड़े। वैसे हर तानाशाह को यह भ्रम होता है कि वो कभी हारेगा ही नहीं। लड़ेंगे-जीतेंगे!!”

Courtesy: Boltaup

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