उपचुनाव: मोदी लहर पर भारी पड़ी विपक्ष की एकता, भाजपा को उठाना पड़ा भारी खामियाजा

उपचुनाव: मोदी लहर पर भारी पड़ी विपक्ष की एकता, भाजपा को उठाना पड़ा भारी खामियाजा

नई दिल्ली। बीते 28 मई को देश के कई राज्यों में हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। इन उपचुनावों में भाजपा को भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इस उपचुनाव में भाजपा के सामने तीन राज्यों की चार लोकसभा और नौ राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने की चुनौती थी। लेकिन भाजपा इस चुनौती में फेल रही। चार लोकसभा सीटों में से भाजपा को एक जबकि 10 विधानसभा सीटों में से भाजपा को केवल 2 सीटों पर जीत हासिल हुई है। इसके अलावा तीन पर कांग्रेस और पांच पर अन्य दलों को जीत हासिल हुई।

(यूपी) कैराना लोकसभा सीट- इस सीट पर वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर हुकुम सिंह ने जीत हासिल की थी, लेकिन उसके निधन के बाद यह फिर से खाली हो गई थी। इस उपचुनाव में भाजपा का मुकाबला लामबंद हुए पांच दलों से था। रालोद ने यहां से तबस्सुम हसन को उम्मीदवार बनाया था जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को हराकार लोकसभा में रालोद का खाता खोला है।

(महाराष्ट्र) पालघरमहाराष्ट्र- यह सीट भाजपा सांसद चिंतामण वनगा के निधन की वजह से खाली हुई थी। इस उपचुनाव में शिवसेना ने चिंतामण के बेटे श्रीनिवास को अपने पाले में कर भाजपा के सामने कड़ी चुनौती रखी थी। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राजेंद्र गावित को अपना प्रत्याशी घोषित किया जिन्होंने भाजपा के फैसले को सही साबित करते हुए जीत हासिल की।

(महाराष्ट्र) भंडारा-गोंदिया: वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के टिकट पर नाना पटोले ने जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। जिसकी वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुए हैं। इस उपचुनाव में भाजपा के हाथों से यह सीट फिसल गई और यहां एनसीपी का आधिपत्य स्थापित हो गया।

नगालैंड- यह सीट राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के इस्तीफ से। वे भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट से हैं। यहां एनडीपीपी ने तोखेयो येपथोमी और एनपीएफ ने सी अपोक जमीर को अपना प्रत्याशी बनाया था। इन दोनों के अलावा इस सीट के लिए कोई और प्रतिद्वंदी नहीं था। जहां एनडीपीपी ने बाजी मारी।  नई दिल्ली। बीते 28 मई को देश के कई राज्यों में हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। इन उपचुनावों में भाजपा को भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इस उपचुनाव में भाजपा के सामने तीन राज्यों की चार लोकसभा और नौ राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने की चुनौती थी। लेकिन भाजपा इस चुनौती में फेल रही। चार लोकसभा सीटों में से भाजपा को एक जबकि 10 विधानसभा सीटों में से भाजपा को केवल 2 सीटों पर जीत हासिल हुई है।

आइये जानते हैं चार लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कहां किस पार्टी ने बाजी मारी-

(यूपी) कैराना लोकसभा सीट- इस सीट पर वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर हुकुम सिंह ने जीत हासिल की थी, लेकिन उसके निधन के बाद यह फिर से खाली हो गई थी। इस उपचुनाव में भाजपा का मुकाबला लामबंद हुए पांच दलों से था। रालोद ने यहां से तबस्सुम हसन को उम्मीदवार बनाया था जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को हराकार लोकसभा में रालोद का खाता खोला है।

(महाराष्ट्र) पालघरमहाराष्ट्र- यह सीट भाजपा सांसद चिंतामण वनगा के निधन की वजह से खाली हुई थी। इस उपचुनाव में शिवसेना ने चिंतामण के बेटे श्रीनिवास को अपने पाले में कर भाजपा के सामने कड़ी चुनौती रखी थी। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राजेंद्र गावित को अपना प्रत्याशी घोषित किया जिन्होंने भाजपा के फैसले को सही साबित करते हुए जीत हासिल की।

(महाराष्ट्र) भंडारा-गोंदिया: वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के टिकट पर नाना पटोले ने जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। जिसकी वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुए हैं। इस उपचुनाव में भाजपा के हाथों से यह सीट फिसल गई और यहां एनसीपी का आधिपत्य स्थापित हो गया।

नगालैंड- यह सीट राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के इस्तीफ से। वे भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट से हैं। यहां एनडीपीपी ने तोखेयो येपथोमी और एनपीएफ ने सी अपोक जमीर को अपना प्रत्याशी बनाया था। इन दोनों के अलावा इस सीट के लिए कोई और प्रतिद्वंदी नहीं था। जहां एनडीपीपी ने बाजी मारी।

 

Courtesy: puridunia.

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