FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में गिरावट जारी है, परन्तु PM मोदी के विदेशी दौरे भी जारी है

FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में गिरावट जारी है, परन्तु PM मोदी के विदेशी दौरे भी जारी है

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में गिरावट दर्ज हुई है. साल 2016 के 44 अरब डॉलर की तुलना में 2017 में यह आंकड़ा घटकर 40 अरब डॉलर हो गया. संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी, अंकटाड) की विश्व निवेश रिपोर्ट 2018 में यह जानकारी दी गई.

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में एफडीआई में कमी के कारण दक्षिण एशिया में एफडीआई में चार प्रतिशत की गिरावट आई और यह आंकड़ा 52 अरब डॉलर रहा. अंकटाड के मुताबिक, भारत में एफडीआई में 2016 के 44 अरब डॉलर में गिरावट आई और यह आंकड़ा 2017 में 40 अरब डॉलर रहा.

भारत में जहां एफडीआई में कमी आई है तो दुनिया के अन्य विकासशील देशों में यह स्थिर बना हुआ है. शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में विकासशील देशों में एफडीआई का प्रवाह 671 अरब अमेरिकी डॉलर पर स्थिर बना हुआ है. इन देशों के लिए हालांकि चिंता की बात यह है कि 2016 के गिरावट की तुलना में 2017 में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. 2016 में विकासशील देशों में 10 फीसदी एफडीआई की कमी दर्ज की गई थी, जबकि विकसित देशों में यह कमी 37 फीसदी तक पहुंच गई.

अंकटाड के महासचिव मुखिसा किटूयी ने हालिया रिपोर्ट के बारे में कहा, ‘एफडीआई पर दबाव और वैश्विक कंपनियों में सुस्ती’ दुनिया के नीति-नियंताओं के लिए बड़ी चिंता की बात है, खासकर विकासशील देशों के लिए. गरीब देशों में लगातार विकास बनाए रखने के लिए उत्पादक इकाइयों में निवेश बनाए रखना जरूरी है.’

भारत जैसे विकासशील देशों में ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में शामिल अमेरिका और ब्रिटेन में भी एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई है.

रॉयटर की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2017 में अमेरिका में एफडीआई का कुल प्रवाह 275 अरब डॉलर रहा जिसमें कॉरपोरेट टेकओवर और विदेशी स्टार्ट अप प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. साल 2017 में ही डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की बागडोर संभाली थी. साल 2016 में अमेरिका में एफडीआई 457 अरब अमेरिकी डॉलर रहा जो 2017 में घटकर 275 अरब डॉलर हो गया.

ब्रिटेन को एफडीआई के मामले में बड़ा झटका झेलना पड़ा. 2016 में 196 अरब डॉलर का एफडीआई 2017 में घटकर 15 अरब डॉलर पर गिर गया. इसके पीछे कुछ बड़े करारों को जिम्मेदार माना गया. 2017 का एफडीआई 2015 की राशि से आधे से भी कम दर्ज किया गया.

 

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