पूर्व RBI गवर्नर ने ‘बैंक घोटालों’ के लिए मोदी सरकार को लताड़ा, कहा- घोटाले रोकने में नाकाम है ये सरकार

पूर्व RBI गवर्नर ने ‘बैंक घोटालों’ के लिए मोदी सरकार को लताड़ा, कहा- घोटाले रोकने में नाकाम है ये सरकार

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी ने बैंकों में हो रहे घोटालों के लिए सरकार को लताड़ा है। साथ ही उन्होंने सार्वजनिक बैंकों के पुनर्पूंजीकरण में हो रही देरी तथा अनिश्चितता पर चिंता व्यक्त की है।

रेड्डी ने शिवाजी विश्वविद्यालय में ‘कीपिंग बैंक सेफ’ विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि सार्वजनिक बैंकों के स्वामी होने के नाते इस तरह के घोटाले से होने वाले नुकसान के बाद करदाताओं के सवालों के प्रति सरकार जवाबदेह है।

‘करदाता जिन्होंने सरकार के स्वामित्व वाले बैंकों को अपना पैसा सौंपा है, उन्हें सरकार से पूछना चाहिए कि वह बताए कि आखिर ऐसा क्यों? क्योंकि सरकार पैसों की संरक्षक है और यह धोखाधड़ी रोकने में असफल हुई है।’

उन्होंने कहा, ‘हालिया महीने में एकमात्र बैंक से संबंधित बड़ा घोटाला सामने आया जिसमें हजारों करोड़ों का चूना लगा। यह स्पष्ट है कि यह धोखाधड़ी है। किसे इन धोखाधड़ियों के बारे में सबसे अधिक चिंता करनी चाहिए?’

उन्होंने सरकार को ज़िम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा, ‘जिन्हें सबसे अधिक चिंता करनी चाहिए वे बैंकों के मालिक हैं और इन बैंकों की मालिक सरकार है। उसी का नुकसान होता है।’

2003 से 2008 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे वाईवी कुरैशी ने कहा कि इस तरह के बैंकिंग घोटालों में होने वाले नुकसान की भरपाई करदाता करते हैं। उन्होंने कहा कि पीएनबी का घोटाला इतना बड़ा है कि इससे भारतीय रिजर्व बैंक की विश्वसनीयता पर आंच आती है।

“बैंकों में जनता का विश्वास जमाने की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक की होती है। ऐसे में आरबीआई को अपनी पर्यवेक्षण व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।”

बता दें, कि बैंक घोटालों के कारण बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में आए आकड़ो के मुताबिक, 2017-18 में देश के बैंकों को 87000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। ये अब तक का सबसे ज़्यादा घाटा है।

Courtesy: Boltaup

Categories: India

Related Articles