भूमि सुधार का दावा करने वाली बीजेपी पूरी तरह नाकाम, देश को हुआ 3.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

भूमि सुधार का दावा करने वाली बीजेपी पूरी तरह नाकाम, देश को हुआ 3.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

भाजपा ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि वो देश का हर क्षेत्र में विकास करेगी। इसलिए ही 2014 में चुनाव जीतने के बाद मोदी सरकार ने गुड-गवर्नेंस का नारा दिया।

ये दावा किया गया था कि सरकार गवर्नेंस को इतने बहतर तरीके से चलाएगी कि देश में अव्यवस्थित कार्यों में हो रहे नुकसान लाभ में बदल जाएँगे। लेकिन अपने ही इस मापदंड पर सरकार खरी नहीं उतरी है।

मोदी सरकार भूमि सुधार पर ध्यान नहीं दे रही है। इस कारण देश को लाखों करोड़ का नुकसान हो रहा है।

वर्ष 2014-15 में भारत में भूमि उपयोग में गिरावट के कारण सालाना आर्थिक नुकसान 3.17 लाख करोड़ रुपये के बराबर हुआ है, जो 2014-15 में देश के सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 फीसदी है।

यह जानकारी हाल ही में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए एक अध्ययन में सामने आई है।

दिल्ली स्थित वैचारिक संस्था, ‘द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट’ (टीईआरआई) द्वारा किए गए 2018 के अध्ययन के मुताबिक, सरकार को भूमिसुधार की गति तेज करने की जरूरत है। क्योंकि भूमि क्षरण की लागत 2030 में भूमिसुधार की लागत से बाहर हो जाएगी।

अध्ययन में कहा गया है कि मौजूदा पारिस्थितिक तंत्र की गिरावट बड़ी चिंता का विषय है। अध्ययन में आगे कहा गया है, “यह एक गंभीर चिंता है, विशेष रूप से यह देखते हुए कि भारत 2030 में भूमि अवक्रमण-तटस्थ होना है, जहां जमीन में गिरावट में कोई वृद्धि भूमि पुनर्वास में समान लाभ से संतुलित होती है।”

Courtesy: Boltaup

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