जज लोया मामले में एक नया खुलासा: महाराष्ट्र की भाजपा सरकार के कहने पर नागपुर गए थे जज लोया

जज लोया मामले में एक नया खुलासा: महाराष्ट्र की भाजपा सरकार के कहने पर नागपुर गए थे जज लोया

महाराष्ट्र की भाजपा सरकार सीबीआई जज लोया की मौत के मामले में फंसती नज़र आ रही है। इस मामले में एक नया खुलासा सामने आया है। अब तक ये कहा जा रहा था कि जज लोया नागपुर किसी शादी में शामिल होने गए थे। लेकिन अब ये बात सामने आई है कि वो सरकारी काम से नागपुर गए थे।

इसके लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से उनके लिए नागपुर के सरकारी गेस्ट हाउस रवि भवन में कमरा भी बुक कराया गया था।

राज्य सरकार के एक आधिकारिक पत्र का हवाला देते हुए नागपुर के वकील सतीश यूइके ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका देकर सीबीआई जज बीएच लोया की मौत के मामले में उपयुक्त मुआवजा देने की मांग की है। याचिका में यह दावा किया गया है कि जज लोया की मृत्यु ‘ड्यूटी पर’ हुई थी।

ऐसा ही दावा कैरावान पत्रिका ने एक आरटीआई के हवाले से किया है। उसमें भी ये बात सामने आई है कि जज लोया सरकारी काम से नागपुर गए थे।

यूइके ने अब दावा किया है कि नागपुर के वीआईपी अतिथि गृह ‘रवि भवन’ में वीआईपी सूट आरक्षित कराने के लिए दिए गए पत्र में यह कहा गया है कि जज लोया ‘सरकारी काम के सिलसिले में’ नागपुर गए थे।

ये 27 नवंबर 2014 को महाराष्ट्र सरकार के कानून विभाग में काम करने वाली डेस्क अधिकारी श्रीमती ईएम भार्गव के हस्ताक्षर से जारी उस पत्र की प्रति है।

पत्र में कहा गया था:“महोदय, उपरोक्त विषय के सिलसिले में आपको ऐसा बताया जाता है कि मुंबई से माननीय श्री बीएच लोया और माननीय श्री विनय जोशी, दोनों मुंबई के जिला एवं सत्र जज, 30.11.2014 की अहले सुबह से 01.12.2014 की 7 बजे सुबह तक सरकारी काम के लिए वहां रहेंगे। यह आग्रह किया जाता है कि उनके रहने के लिए एक बिस्तरों वाले एक वातानुकूलित वीआईपी सूइट आरक्षित रखें।”

 

तो अब सवाल ये है कि महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्यूँ कहा कि लोया शादी में शामिल होने नागपुर गए थे। क्या सरकार नहीं चाहती थी कि ये बात सामने आए कि उसने ही जज लोया को नागपुर भेजा था।

गौरतलब है कि नागपुर के रवि भवन में ही जज लोया की कथित तौर पर तबियत बिगड़ी थी। और कुछ लोगों का दावा है कि वहां उन्हें मारा गया था। जज लोया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी कई सवाल उठ चुके हैं।

बता दें, कि जब लोया की मौत हुई तो वो सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले को देख रहे थे। इस मामले में मुख्य आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें की कार्रवाई गुजरात से बाहर करने का आदेश दिया था जिसके बाद ये मामला सीबीआई अदालत में आया।

यहाँ इस मामले को देख रहे पहले न्यायाधीश उत्पत ने अमित शाह को मामले की कार्रवाई में उपस्थित न होने को लेकर फटकार लगाई थी। लेकिन अगली तारीख से पहले ही उनका ट्रान्सफर हो गया।

इसके बाद बृजगोपाल लोया आये, उन्होंने भी अमित शाह के उपस्थित न होने पर सवाल उठाए और सुनवाई की तारीख 15 दिसम्बर 2014 तय की लेकिन 1 दिसम्बर को ही महाराष्ट्र के नागपुर में उनकी मौत हो गई। इसके बाद न्यायधीश एमबी गोसवी आये, जिन्होंने दिसम्बर 2014 के अंत में ही अमित शाह को इस मामले में बरी कर दिया।

नवम्बर 2017 में ‘द कैरवान’ को दिए एक इंटरव्यू में जज लोया की बहन डॉ. अनुराधा बियाणी ने उनकी मौत पर सवाल उठाते हुए हत्या की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा था कि सोहराबुद्दीन मामले में आरोपियों के पक्ष में फैसला देने के लिए लोया को 100 करोड़ की रिश्वत की पेशकश हुई थी। लोया के कई दोस्तों ने भी उनकी मौत पर सवाल उठाए थे।

Courtesy: Boltaup

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