अमीरों पर मेहरबान मोदी सरकारः 2017-18 में उधोगपतियों के 1.44 लाख करोड़ रुपये के लोन माफ

अमीरों पर मेहरबान मोदी सरकारः 2017-18 में उधोगपतियों के 1.44 लाख करोड़ रुपये के लोन माफ

एक तरफ देश के बैंकों का एनपीए बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ मोदी सरकार उद्योगपतियों का लोन माफ़ करती जा रही है। वर्ष 2017-18 में भी सरकार ने लाखों करोड़ रुपये माफ़ किए हैं।

गौरतलब है कि देश के बैंकों पर नॉन प्रॉफिट एसेट्स (एन.पी.ए) का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसी बढ़ते एनपीए के कारण बैंकों को हज़ारों करोड़ का घाटा हो रहा है। एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होता। इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हीस्सा उद्योगपतियों का है।

अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालियाँ दिखा देते हैं और उनका लोन एन.पी.ए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सामूहिक शुद्ध घाटा 2017-18 में बढ़कर 87,357 करोड़ रुपये हो गया। ये भारत के इतिहास में सबसे ज़्यादा है। यह इतनी बड़ी रकम है कि हर भारतीय को लगभग 670 रुपए मिल सकते थे।

इसके बावजूद आईसीआरए के आंकड़ों के अनुसार, 1.44 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन को राइट ऑफ (बट्टा खाते में डालना) किया गया है।

कहने को तो राईट ऑफ किया गया लोन सीधे तौर पर कर्जमाफी नहीं है लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है कि राइट ऑफ किया जाए और फिर वो लोन वापस लौट आए।

बैंकों द्वारा बट्टा खाते में डाली गई यह राशि पिछले साल की तुलना में 61.8 प्रतिशत ज्यादा है। पिछली साल बैंकों द्वारा 89,048 करोड़ रुपये बट्टा खाते में डाले गए थे।

Courtesy: Boltaup

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