गुजरात में बुलेट ट्रेन का जमकर विरोध, 15 गाँवों के किसान कर रहे मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

गुजरात में बुलेट ट्रेन का जमकर विरोध, 15 गाँवों के किसान कर रहे मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

प्रधानमंत्री मोदी की स्वप्निल परियोजना बुलेट ट्रेन का अपने गृह राज्य में ही विरोध हो रहा है। गुजरात में सूरत जिले के किसान सड़कों पर उतरकर इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे है।

जिले के 15 गांवों के 200 से अधिक किसान ट्रैक्टर और मोटरसाइकिलों से सूरत जिला समाहरणालय पहुंचे, वो लोग परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारी किसानों ने जिला समाहर्ता को अपनी 14 आपत्तियों के साथ एक ज्ञापन सौंपा।

बुलेट ट्रेन परियोजना का इसी प्रकार महाराष्ट्र के पालघर में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहां ही लोगों ने तालाब, एंबुलेंस सेवाएं, सोलर एनर्जी से चलने वाली स्ट्रीट लाइट और मेडिकल की सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

विरोध-प्रदर्शन में शामिल किसान नेता जयेश पटेल ने संवाददाताओं को बताया कि परियोजना के लिए 21 गांवों में करीब 140 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जा रही है, जिसका किसानों ने विरोध किया है। जयेश पटेल ने कहा किअ निवार्य पर्यावरण संबंधी और सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन किए बगैर ही जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की गई।

दरअसल, 508 किलोमीटर लंबे इस ट्रेन कॉरिडोर का करीब 110 किलोमीटर पालघर जिले से गुजरता है. इस प्रोजेक्ट के लिए 73 गांवों की 300 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी जो इस रूट पर पड़ने वाले करीब 3,000 लोगों को प्रभावित करेगा। पालघर जिले के आदिवासी और फल उत्पादक इस प्रोजेक्ट का जमकर विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करने से पहले जिला समाहर्ता को अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की बाजार दर की घोषणा करनी चाहिए, मगर अभी तक ऐसा नहीं किया गया है।

आईएएनएस को पटेल ने कहा कि पश्चिमी रेलवे के पास इस परियोजना के लिए पर्याप्त जमीन है, इस परियोजना के लिए अब हमारी जमीन अधिग्रहण करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम पालघर स्थित अपने समकक्षों के संपर्क में हैं और उन्हीं की तरह हम भी अपनी जमीन से वंचित नहीं होना चाहते हैं।

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