दलितों से मैला ढुलवाने में बीजेपी शासित राज्य सबसे आगे, इस कुप्रथा को कब तक आध्यात्म कहेंगे मोदी ?

दलितों से मैला ढुलवाने में बीजेपी शासित राज्य सबसे आगे, इस कुप्रथा को कब तक आध्यात्म कहेंगे मोदी ?

मैला ढोने वाले श्रमिकों की संख्या देखें तो बीजेपी शासित यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हैं। भले ही यूपी में बीजेपी सरकार बने अभी अधिक समय न हुआ हो मगर अन्य राज्यों में बीजेपी की सरकार का लम्बा इतिहास है , जैसे कि मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों से शिवराज का शासन है।

मानवता को कलंकित करने वाली मैला ढोने की प्रथा आज भी बदस्तूर जारी है। इस अमानवीय कुप्रथा का चलन सबसे ज्यादा बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश में है। यानी इस गंदे काम के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले नंबर पर है।

तमाम सरकारें दावा करती रही हैं कि मैला ढोने की प्रथा खत्म हो चुकी है लेकिन सिर्फ यूपी में ही इस काम को करने वाले 28000 से अधिक श्रमिक हैं।

दरअसल केंद्र सरकार की नीति आयोग ने सभी राज्यों से डाटा मांगा था। कई राज्यों ने नीति आयोग को भेजे गए डाटा में ऐसे श्रमिकों की संख्या शून्य बताई थी। राज्यों से डाटा लेने के बाद सर्वे के लिए अंतरमंत्रालयीन टास्क फोर्स बनाया गया था।

इस सर्वे के माध्यम से कई राज्य सरकारों के झूठ पकड़े गए हैं। उत्तरप्रदेश सरकार ने 1056 मैला ढोने वाले श्रमिक होने की बात स्वीकार की थी। किंतु सर्वे में 28796 अस्वच्छ काम में लगे श्रमिक पाए गए।

मध्यप्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पंजाब ने दावा किया कि उनके यहां ऐसे श्रमिक हैं ही नहीं। जबकि सच्चाई ये है कि इस गंदे काम के मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। कानूनन प्रतिबंध के बाद भी मध्य प्रदेश में 8016 श्रमिक इस कुप्रथा के शिकार हैं।

इस मामले में बीजेपी शासित राजस्थान तीसरे नंबर पर है। यहां 6643 श्रमिक इस अमानवीय काम को करने के लिए मजबूर हैं। जबकि राजस्थान सरकार ने 3141 मैला ढोने वाले श्रमिक होने की बात ही स्वीकार की थी।

महाराष्ट्र सरकार ने दावा किया था कि उनके यहां मैला ढोने वालों की संख्या 429 जबकि भारत सरकार का सर्वे बताता है कि बीजेपी शासित महाराष्ट्र में 3608 श्रमिक मैला ढोने का काम करते हैं। गौरतलब है कि मैला ढोने का काम करने वाले ज्यादातर श्रमिक दलित समुदाय के ही होते हैं।

Categories: Politics

Related Articles