पनामा पेपर्स में बीजेपी नेता का आया नाम सामने, पूछताछ होने पर मिटवा दिया दस्तावेजों से नाम

पनामा पेपर्स में बीजेपी नेता का आया नाम सामने, पूछताछ होने पर मिटवा दिया दस्तावेजों से नाम

चर्चित पनामा पेपर लीक मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता का नाम आने से हड़कंप मच गया है। दरअसल पनामा से संबंधित कागजातों की छानबीन करते वक्त इंडियन एक्सप्रेस ने कोलकाता के व्यापारी शिशिर के बजोरिया से उनके मालिकाना हक वाले फर्म ब्रिटिश वर्जिन आइलैन्ड (टापू) (BVI) के बारे में जानकारी मांगी। इसके दो दिन के बाद ही बाजोरिया ने मोसैक फोन्सेका से कॉन्टैक्ट कर उसके रिकॉर्ड को अपडेट करने को कहा।
दस्तावेंजों से यह पता चलता है कि 23 मार्च 2016 को फर्स्ट नेम्स ग्रुप, (वास्तविकता में आईलैंड पर रहने वाले इंसान) ने हैप्टिक बीवीआई (लिमिटेड) की स्थापना मोसैक फोन्सेका के साथ की। इसके बाद उसने पानामा लॉ फर्म से कॉन्टैक्ट कर जितना जल्दी हो सके इसके मालिक के बारे में सूचनाएं अपडेट करने को कहा। फर्म से कहा गया कि नाम को अपडेट कर शिशिर कुमार बाजोरिया की जगह चार्लस गैरी हेपबर्न किया जाए।

साल 2016 में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए बजोरिया ने कहा था कि वो फर्स्ट नेम्स के वो पहले क्लाइंट थे उनके पास हैप्टिक इसका मालिकाना हक नहीं था। उन्होंने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि किसी चूकवश उनका नाम हैप्टिक के प्रबंधन से जुड़ गया है। फर्स्ट नेम के प्रतिनिधि हेपबर्न और बाजोरिया ने एक संयुक्त स्टेटमेंट में लिखा कि जिस फर्म को हमने मोसैक फोन्सेका के पास भेजा है उसके प्रशासकीय नामों में कुछ त्रुटियां रह गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने 4 अप्रैल 2016 में इस टापू को लेकर बजोरिया के लिंक के बारे में खुलासा किया था। जिसके बाद हैप्टिक बीवीआई के टैक्स अधिकारियों के रडार पर आया था।

एक महीने के बाद 3 मई को हैप्टिक का नाम उन 69 कंपनियों की लिस्ट में शामिल किया गया जिनके बारे में बीवीआई की आर्थिक जांच एजेंसी ने मोसैक फोन्सेका से और अधिक जानकारी मांगी थी। 10 मई को लॉ फर्म ने आर्थिक जांच इकाई को बतलाया कि हैप्टिक का मालिकाना हक बाजोरिया के पास है। लेकिन इसी महीने में फर्स्ट नेम्स ने मोसैक फोन्सेका को बतलाया कि हैप्टिक बिक चुकी है। फर्स्ट नेम्स ने कहा कि हैप्टिक का मालिकाना हक उसके पास है।
हालांकि अक्टूबर 2016 में मोसैक फोन्सेका ने दोबारा बीवीआई अथॉरिटी को सूचना दी थी कि बजोरिया के पास हैप्टिक का मालिकाना हक था जो मई में खत्म हो गया। यह सूचना बीवीआई प्रबंधन ने मार्च 2017 में अपग्रेड किया जिसमें यह बतलाया गया कि हेपबर्न हैप्टिक के मालिक हैं।

मोसैक फोन्सेका के 2016 के रिकॉर्ड्स यह बतलाते हैं कि हैप्टिक का निर्माण उससे जुड़ी अन्य कंपनियों की संपत्ति हासिल करने और एक नए ट्रस्ट बनाने के लिए किया गया था। इस संपत्ति की कीमत 1 मिलियन यूएस डॉलर से ज्यादा थी। फर्स्ट नेम्स के प्रवक्ता ने कहा है कि बाजोरिया कभी भी हैप्टिक बीवीआई लिमिटेड के स्टेक होल्डर नहीं रहे हैं और ना ही इनके पास हैप्टिक का मालिकाना हक रहा है। प्रवक्ता के मुताबिक फर्स्ट नेम ग्रुप ने मोसैक फोन्सेका को भेजे गए अपने कंपनी के प्रशासकीय नामों की लिस्ट में कुछ गलतियां कर दी थी। गलतियों के बारे में जानकारी मिलने पर फर्स्ट नेम्स ग्रुप ने तुरंत मोसैक फोन्सेका को इसके बारे में सूचना दी और इसके नामों में सुधार करने की अपील भी की।

शिशिर बाजोरिया के प्रवक्ता ने कहा है कि बाजोरिया को यह बात अखबारों से पता चला कि उनका नाम हैप्टिक बीवीआई लिमिटेड से जोड़ा जा रहा है क्योंकि वहां कुछ नामों को लेकर गलतियां हो गई हैं। उन्होंने हर संभव प्रयास कर इस नाम को हटवाने की कोशिश की। फर्स्ट नेम्स ग्रुप ने बाजोरिया को बतलाया है कि प्रशासकीय नामों में हुई गलतियों को सुधार लिया गया है। आपको बता दें कि बाजोरिया एक बड़े व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। उनका परिवार वर्षों से जूट और चाय के व्यापार करता आया है। कभी पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के काफी करीबी रहे बाजोरिया ने अगस्त 2014 में बीजेपी ज्वायन किया था।

 

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