कमज़ोर हो रही भारतीय अर्थव्यवस्था, वैश्विक स्तर पर निवेश के लिए भारत की रेटिंग 5 साल में सबसे कम

कमज़ोर हो रही भारतीय अर्थव्यवस्था, वैश्विक स्तर पर निवेश के लिए भारत की रेटिंग 5 साल में सबसे कम

भारत की आर्थिक स्तिथि कमज़ोर होती जा रही है। और इसका असर वैश्विक तौर पर देश की छवि पर भी पड़ रहा है। भारत, जिसको अभी तक विश्व की नई उभरती अर्थव्यवस्था कहा जा रहा था आज वहां लोग निवेश करने से कतरा रहे हैं।

बिज़नस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत निवेश के लिए वैश्विक स्तर पर पांच साल के सबसे निचले स्तर पर चला गया है। मतलब वैश्विक निवेशक भारत में निवेश नहीं करना चाह रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक निवेशकों की पसंद को दर्शाने वाला एमएससीआई इमर्जिंग मार्किट इंडेक्स में भारत की रेटिंग 100 बीपीएस रह गई है। जो कि 2015 में 800 बीपीएस थी।

दरअसल, 2015 के मोदी सरकार के द्वारा उठाए गए आर्थिक क़दमों ने देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाला है। नोटबंदी और जीएसटी के कारण गिर चुकी अर्थव्यवस्था अब भी उठ नहीं पाई है। अभी तक देश में मांग नोटबंदी के पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है। मांग ना होने का मतलब है जनता के पास पैसा ना होने। मांग ना होने से उदयोगों में भी कम वस्तुएं बनेगी और इसका असर लोगों के रोज़गार पर भी पड़ेगा।

इसी कारण देश में निवेश घटता जा रहा है। एफडीआई में सरकार द्वारा ढील देने के बावजूद निवेश नहीं बढ़ रहा है। किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी निवेश होता है लेकिन भारत में घरेलु के साथ विदेशी निवेश भी घटता जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट ने बीते साल हुए भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के बारे में चिंताजनक खबर दी है। यूएन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (यूएनसीटीएडी) की वर्ल्ड इनवेस्टमेंट रिपोर्ट-2018 के मुताबिक, भारत में 2017 में आई एफडीआई 2016 की तुलना में 9 फीसदी कम रही।

निवेश के बजाए उल्टा निवेशक अपना पैसा यहाँ से निकाल रहे हैं। विदेशी कारोबारी बड़े स्तर पर अपना पैसा भारतीय बाज़ार से निकाल रहे है। ये बताता है कि हमारी अर्थव्यवस्था बुरे दौर में है और निकट भविष्य में सुधार की बहुत कम उम्मीद है।

वर्ष 2018 में विदेशी कारोबारी भारतीय बाज़ार से 12 बिलियन डॉलर यानि लगभग 78 हज़ार करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। और 2019 में ये आकड़ा 44 बिलियन डॉलर यानि लगभग 2 लाख 66 हज़ार करोड़ पर पहुँच सकता है।

इस से सवाल मोदी सरकार कि आर्थिक नीतियों पर उठता है। निवेश इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है। नोटबंदी और जीएसटी से बाज़ार में बड़ी संख्या में व्यवसाय बंद हुए हैं। साथ ही लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार भी हुए हैं।

अगर निवेश नहीं बढ़ता है तो ना नए व्यवसाय शुरू होंगे और ना ही बेरोजगार हुए लोगों को रोजगार मिलेगा।

Courtesy: Boltaup

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